‘इलेक्टोरल बॉण्ड का पैसा कब लौटाएगी BJP’ अखिलेश यादव ने FCRA बिल को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
Lucknow : केंद्र सरकार विदेशी पैसे से चलने वाली सामाजिक संस्थाओं को रेगुलेटरी से कंट्रोल ओरिएंटेड करने जा रही है, जिसे लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार इसके बहाने उनकी संपत्तियां हड़प लेना चाहती है. सपा मुखिया ने सवाल किया कि क्या सरकार पीएम फंड में आए पैसे को भी लौटाएगी या नहीं.
सपा अध्यक्ष ने उठाए केंद्र पर सवाल
अखिलेश यादव ने इसे लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी और कहा- ‘NGOs की विदेशी फ़ंडिंग को नियमित करने के नाम पर जो Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 की धांधली होने वाली है, उसको लाने से पहले भाजपा बताए कि:
– जो पैसा विदेशों से PM CARE FUND में आया था वो लौटाया जाएगा या उसको भी ऑडिट की तरह विशेष छूट देकर गटक लिया जाएगा.
– जो पैसा इलेक्टोरल बॉण्ड के माध्यम से आया था उसे भाजपा कब लौटाएगी. जब इलेक्टोरल बॉण्ड ही अवैध घोषित हो गये हैं तो उससे मिला पैसा कैसे वैध है?
– और जो पैसा अन-रजिस्टर्ड तथाकथित लाल किलाई NGO के खातों में आता है उसका क्या होगा? कहीं ये उसी की विदेशी जड़ें काटने की आपसी लड़ाई तो नहीं है.
– और तथाकथित धर्मार्थ उगाहे गये, मंदिर निर्माण के नाम पर बटोरे उस चंदे का हिसाब कौन देगा, जो भाजपा से संबद्ध संगी-साथी मुखौटा संगठनों मतलब परिषद, वाहिनी आदि ने हड़प लिए. उसमें भी विदेशों से अथाह पैसा आया था. इनसे जुड़े सभी पदाधिकारियों के खातों और संपत्तियों से वसूली की जाए.
दरअसल ये भाजपाई राजनीति की अलोकतांत्रिक, अति नियंत्रणवादी एकाधिकारी सोच है जो NGOs पर अवांछित नियंत्रण करके, उन्हें अपनी कठपुतली बनाना चाहती है और इसके बहाने धीरे-धीरे उनकी संपत्तियों को ही हड़प लेना चाहती है.
भाजपा सरकार ख़ुद तो कुछ करती नहीं है और जो सच्चे स्वतंत्र NGOs अच्छा काम कर रहे हैं उनको भी नहीं करने देना चाहती है क्योंकि कई बार जनता कहती है कि सरकार से ज़्यादा अच्छा काम तो गैर सरकारी संस्थाएं कर दिखाती हैं, इससे कई मोर्चों पर सरकार की बेहद किरकिरी होती है और भाजपाइयों की नाकामी उजागर हो जाती है.
भाजपा ये भी बताए कि जो पैसा विदेश से विधि-विधान से आ रहा है उस पर तो इतने प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं लेकिन उस अकूत धन का क्या जो अवैध रूप से विदेश जा रहा है मतलब जो दौलत उनके मित्र विदेश ले जाकर, और वहाँ बेख़ौफ़ रहकर आराम से ऐश कर रहे हैं, उनकी ज़मीनें-संपत्तियां कब जब्त करके वसूली की जाएगी या उन ’भगोड़े भाजपाई भाईयों’ को वैसे ही विशेष छूट मिलती रहेगी जैसे कि साम्राज्यवादी ताक़तों का साथ देनेवाले उनके मुख़बिर संगी-साथियों और वैचारिक पूर्वजों को स्वतंत्रता से पहले मिलती रही थी. जनता इस बार भाजपा का पक्षपात का एटीएम बंद कर देगी.
भाजपा की बदनीयत और बेईमानी ही उसके हर बिल की बुनियाद होती है. भाजपा जाए तो चैन आए! बुरे दिन जाने वाले हैं.’
बता दें कि केंद्र सरकार ग़ैर सरकार संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी फंड को लेकर जो संशोधन बिल ला रही है उसके बाद इन नियमों रेगुलेटरी से बदल कर कंट्रोल ओरिएंटेड हो जाएगा. इसका मतलब ये कि विदेशी पैसे का हिसाब-किताब केवल कागजों तक नहीं बल्कि उस पैसे से बनाई गई हर संपत्ति पर सरकार की नजर होगी.
बीजेपी ने देश के लिए बताया बेहद जरूरी
वहीं बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने FCRA बिल को देश के लिए बहुत जरुरी बताया. उन्होंने कहा कि कई बार विदेश से आने वाले चंदे का उपयोग देश विरोधी और सरकार विरोधी आंदोलनों में करते हैं. इस बिल पर विपक्षी दलों के विरोध पर दिनेश शर्मा ने कहा कि माइनोरिटी इंस्टीट्यूशन हो या मेजोरिटी किसी को देश की सुरक्षा से नहीं खेलने दिया जाएगा.
