आखिर क्या है प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप और ये क्यों है जरूरी?

 

पिछले दिनों बॉलिवुड ऐक्टर अर्जुन कपूर और उनकी कथित गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा को मुंबई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एक साथ देखा गया था और उसके बाद से खबरों का बाजार गर्म है कि ये दोनों शादी से पहले करवाए जाने वाले प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप के लिए हॉस्पिटल पहुंचे थे। हालांकि इस खबर की अब तक पुष्टि नहीं हो पायी है। कहा जा रहा है कि बॉलिवुड के सबसे क्यूट कपल्स में से एक दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने भी नवंबर 2018 में शादी से पहले प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप करवाया था। तो आखिर क्या है प्री-मैरिटल चेकअप, इसमें कौन-कौन से टेस्ट करवाए जाते हैं और आखिर यह क्यों है जरूरी…

होने वाले बच्चे को बीमारियों से बचाया जा सके
प्री-मैरिटल चेकअप एक ऐसा हेल्थ एग्जामिनेशन है जो जल्द शादी के बंधन में बंधने जा रहे कपल्स को जरूर करवाना चाहिए ताकि उन्हें पता चल सके कि दोनों पार्टनर में से किसी को भी किसी तरह की कोई जेनेटिक, ब्लड से रिलेटेड या संक्रमण वाली कोई बीमारी तो नहीं है। शादी से पहले इस तरह का हेल्थ चेकअप इसलिए भी जरूरी है ताकि होने वाले बच्चे को माता-पिता की मौजूदा बीमारियों के खतरे से बचाया जा सके। इन दिनों दुनियाभर में बच्चों में जेनेटिक और ब्लड ट्रांसमिटेड डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है लिहाजा प्री-मैरिटल चेकअप बेहद जरूरी हो जाता है।

कब करवाना चाहिए प्री-मैरिटल चेकअप?
वैसे तो प्री-मैरिटल चेकअप कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है और बहुत से कपल्स शादी के बंधन में बंधने से पहले इस तरह का हेल्थ चेकअप करवाते हैं। लेकिन अब इसकी पॉप्युलैरिटी कुछ ज्यादा ही हो गई है। यूएई समेत कई देशों में तो शादी से पहले प्री-मैरिटल चेकअप करवाना अनिवार्य है। जहां तक प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप की बात है तो इसे कभी भी करवाया जा सकता है लेकिन शादी से 6 महीने पहले इस हेल्थ चेकअप को करवाने का सही समय माना जाता है।

कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप के तहत शादी से पहले ये 4 मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिए…

HIV और STD से जुड़े टेस्ट
एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और इस तरह की कई बीमारियां हैं जो जीवनभर व्यक्ति के साथ रहती हैं और इन्हें मैनेज करना आसान नहीं होता जिससे कई बार शादीशुदा जिंदगी में भी मुश्किलें आ सकती हैं। लिहाजा अगर आपके पार्टनर को इसमें से कोई बीमारी है तो आप अपने लिए उचित मेडिकल केयर ले सकते हैं या फिर यह भी फैसला ले सकते हैं कि आपको शादी के फैसले में आगे बढ़ना है या नहीं। इसके अलावा किसी भी तरह के सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज की भी पहले से जानकारी होना सही रहता है ताकि उसका सही इलाज हो सके और साथ ही इन्फर्टिलिटी और मिसकैरिज के खतरे को कम किया जा सके।

ब्लड ग्रुप कम्पैटिबिलिटी टेस्ट
पति-पत्नी का ब्लड ग्रुप कम्पैटिबल होना जरूरी है ताकि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की समस्या या बीमारी को रोका जा सके।

फर्टिलिटी टेस्ट
इस तरह का टेस्ट भी बेहद जरूरी है और इसके बारे में जितनी जल्दी पता चल जाए उतना अच्छा है ताकि शादी के बाद किसी भी तरह के गैर-जरूरी बायोलॉजिकल, साइकोलॉजिकल, सोशल और इमोशनल ट्रॉमा को रोका जा सके।

जेनेटिक या दूसरे मेडिकल कंडिशन
इस तरह के टेस्ट में डायबीटीज, हाइपरटेंशन, किडनी से जुड़ी बीमारियां, थैलसीमिया, और कुछ तरह के कैंसर का भी टेस्ट किया जाता है ताकि होने वाले बच्चे में इन बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।

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