समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हम : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हम : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

अयोध्या। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ चुनिंदा शिल्पियों (कर्मयोगी) को सम्मानित करने के बाद उपस्थित रामभक्तों को संबोधित किया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु डेढ़ वर्ष के अंतराल पर दूसरी बार अयोध्या पहुंची और राम मंदिर में श्रीराम यंत्र को स्थापित किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि श्रीराम को नमन करना और भारत मां का वंदन हमारे लिए एक जैसा ही है। इस परम पवित्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक, इन सभी आयामों पर हो रहा है। देव-भक्ति और देश-भक्ति, दोनों का मार्ग एक ही है। मैं चाहूंगी कि हमारे सभी देशवासी ‘घट-घट व्यापी राम’ के पवित्र भक्ति-भाव के साथ एकात्म होकर आगे बढ़ें।

राम-राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी देशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में होना मेरे जीवन का कृतार्थ करने वाला पल है। मैं यहां पर आकर गौरवांवित हूं। राम मंदिर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद हमें यह सौभाग्य का पल मिला है।

राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा, मंदिर का ध्वजारोहण हमारे इतिहास की स्वर्णिम तिथियां हैं। मुझे श्रीराम यंत्र की स्थापना का अवसर मिला है। यह प्रभु श्रीराम की मेरे ऊपर कृपा का प्रतीक है। ऐसा मेरा मानना है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत मां का वंदन करना एक जैसा है। आज के इस अवसर पर हम संकल्प लें कि भारत मां के सम्मान और वैभव को शिखर पर ले जाएंगे।

अयोध्या वैश्चिक चेतना का केंद्र : राज्यपाल आनंदी बेन

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का मंदिर अब एक राष्ट्र मंदिर बन चुका है। ये हमारे लिए अत्यंत गौरव का पल है। यह सौभाग्यशाली पल करोड़ों रामभक्तों के संघर्ष और बलिदान के कारण संभव हो सका है। आज अयोध्या वैश्चिक चेतना का केंद्र बन चुकी है।

अयोध्या में होती है रामराज्य की अनुभूति: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज दुनिया भर में युद्ध चल रहे हैं पर हम लोग आज राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के इस आनंदमयी कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। यही तो रामराज्य की अनुभूति है, इसलिए ही तो कहा जाता है कि हमारा भारत वर्ष साधु-संतों की भूमि है।

उन्होंने कहा कि आज राम मंदिर हमारे युवाओं को हमारी संस्कृति से जोड़ रहा है। यही कारण है कि जब नववर्ष का शुभारंभ होता है तो युवा कहीं और नहीं जाकर मंदिर में दर्शन कर अपने नववर्ष का शुभारंभ करता है। उन्होंने सभी रामभक्तों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं और कहा कि आज श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही प्रभु श्रीराम का मंदिर परिपूर्ण हो गया। राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।

राममंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना के बाद आयोजित कार्यक्रम में हजारों रामभक्तों को संबोधित करते हुए श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि इसके साथ ही 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम के मंदिर का निर्माण परिपूर्ण हो गया है।

कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को आमंत्रित किया गया है। इनमें वो लोग भी शामिल रहे जो 1984 से ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए थे।


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