‘सच्चाई की जीत, तानाशाही की हार’, कोर्ट के फैसले के बाद बोली AAP, कहा- पार्टी कट्टर ईमानदार
आम आदमी पार्टी ने कहा कि तथाकथित दिल्ली आबकारी घोटाला मामले को खारिज करने वाली सीबीआई की विशेष अदालत का ऐतिहासिक फैसला मोदी सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है. यह आम आदमी पार्टी को खत्म करने के इरादे से बीजेपी से साठगांठ करने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए भी तमाचा है.
पार्टी ने कहा, ”अदालत का 598 पन्नों का फैसला इस मामले को मुकदमे के लायक भी नहीं मानता है. यह पार्टी के उस लगातार स्टैंड को सही साबित करता है कि यह मामला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जेल भेजने की एक गहरी साजिश थी. यह अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों की ईमानदार छवि को खराब करने की एक हताश कोशिश थी. उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पार्टी को तोड़ने की साजिश रची गई थी.”
बेनकाब हुई बीजेपी की गंदी राजनीति- AAP
आप ने आगे कहा, ”इस ऐतिहासिक फैसले ने मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की झूठ और राजनीतिक दुश्मनी पर आधारित गंदी राजनीति को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है. वे अपने उन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करना चाहते थे जिन्हें मोदी और उनके साथी चुनावों या जनता की अदालत में नहीं हरा सकते थे.”
पार्टी ने कहा, ”कोर्ट के फैसले ने पहले से ही दागदार केंद्रीय एजेंसियों की साख को और भारी ठेस पहुंचाई है. ये एजेंसियां अपने राजनीतिक आकाओं की सेवा करने के लिए अपनी पेशेवर ईमानदारी से पूरी तरह समझौता कर चुकी हैं. वे बेशरमी से एक राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रही हैं. आबकारी मामले में सीबीआई पर की गई टिप्पणियों से साफ है कि देश की इस प्रमुख जांच एजेंसी को इतना बदनाम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.”
बीजेपी के साथ कांग्रेस भी हुई बेनकाब- AAP
आप ने कहा, ”अदालत के फैसले से मोदी जी की बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस भी पूरी तरह बेनकाब हो गई है. यह कांग्रेस ही थी जिसने काल्पनिक आरोपों के साथ इस मनगढ़ंत मामले की शुरुआत की थी. आम आदमी पार्टी को राजनीतिक रूप से खत्म करने की गुप्त सहमति के तहत इसे बीजेपी को सौंप दिया गया था.”
पार्टी ने दावा किया, ”फैसले को पढ़ने से यह साफ हो जाता है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के गुर्गे बेहद अक्षम साबित हुए. उन्हें बड़े पैमाने पर झूठ गढ़कर अरविंद केजरीवाल सरकार को अस्थिर करने का काम सौंपा गया था. दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना और उनके करीबी पूर्व मुख्य सचिव नरेश कुमार को आज भी अपने दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के लिए कोई शर्म नहीं होगी. लेकिन उनके आकाओं को यह समझना चाहिए कि यह टीम बेहद औसत दर्जे की थी. उनके द्वारा सीबीआई को परोसा गया झूठ अदालत में आरोप पत्र के संज्ञान की सीमा भी पार नहीं कर सका.”
किसी को भी लाभ नहीं पहुंचाया गया- AAP
आप ने यह भी दावा किया, ”अदालत ने अपने फैसले में जोर देकर स्पष्ट किया है कि कोई भी आपसी लेन-देन नहीं हुआ था. किसी भी संस्था या व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल या उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ किसी भी गलत काम से जोड़ने का कोई सबूत नहीं था.”
