अलीगढ़ में UGC के नए नियमों पर बवाल, साध्वी प्राची के सम्मेलन में हंगामा और धक्का-मुक्की
अलीगढ़ के अचलताल स्थित रामलीला मैदान में आयोजित हिंदू विराट सम्मेलन के दौरान हंगामा हो गया, जब मुख्य वक्ता साध्वी प्राची के संबोधन के बीच यूजीसी कानून के विरोध में दर्जनों लोग बैनर-पोस्टर लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए. विरोध कर रहे लोगों और आयोजकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई.
थाना गांधीपार्क क्षेत्र स्थित रामलीला मैदान में आयोजित सम्मेलन में साध्वी प्राची निर्धारित समय पर दोपहर में पहुंचीं. कार्यक्रम के अंतिम चरण में जैसे ही उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया, तभी काली पट्टी बांधे और यूजीसी कानून के विरोध में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए मंच की ओर बढ़े. आयोजकों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की, इसी दौरान नोकझोंक और धक्का-मुक्की हो गई.
मंच से बुलाकर समझाने की कोशिश
मामला बढ़ता देख साध्वी प्राची ने मंच से प्रदर्शनकारियों को पास बुलाया और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी यूजीसी कानून को “काला कानून” बताते हुए नारेबाजी करते रहे. बाद में वे मंच के सामने ही धरने पर बैठ गए. साध्वी प्राची लगातार उन्हें शांत करने और संवाद करने की कोशिश करती रहीं.
काफी देर तक समझाने के बावजूद जब प्रदर्शन नहीं रुका तो साध्वी प्राची ने केंद्र सरकार से यूजीसी कानून वापस लेने की बात मंच से कही और प्रदर्शनकारियों से कार्यक्रम स्थल छोड़ने का अनुरोध किया. इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा मंच पर चढ़ने की कोशिश के बाद एक बार फिर धक्का-मुक्की हुई.
असामाजिक तत्वों का आरोप
कार्यक्रम में व्यवधान को लेकर साध्वी प्राची ने कहा कि कुछ इस तरह के असामाजिक तत्व हर जगह मिलते हैं जो शांति से हो रहे प्रोग्राम में व्यवधान डालते हैं. अगर कानून में कोई कमी है तो सरकार उसको देखेगी.
प्रदर्शनकारियों का पक्ष
वहीं, यूजीसी कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी सुमित कुमार ने कहा कि वे हिंदू सम्मेलन में शामिल होने गए थे और प्रदर्शन की पूर्व योजना नहीं थी. उनका आरोप है कि अपनी बात रखने पर उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला. उन्होंने चेतावनी दी कि यूजीसी कानून के खिलाफ आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
यह घटना यूजीसी कानून को लेकर बढ़ते विवाद को दर्शाती है. देश के कई हिस्सों में इस कानून का विरोध हो रहा है और प्रदर्शनकारी इसे छात्रों के हित में नहीं मानते हैं. अलीगढ़ में हुई इस घटना से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और भी गर्माने वाला है.
