यूपीः कुपोषण ने ली दो मासूमों की जान, हरकत में आया स्वास्थ्य अमला, चिकित्सकों ने गांव में डाला डेरा

 

गांव रतनगढ़ में कुपोषण ने दो मासूमों भाई-बहन की जान ले ली जबकि तीन को नूरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया गया है। बृहस्पतिवार को हुई इस घटना के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को गांव में डेरा डाल दिया। इसकी सूचना पर मुरादाबाद से आई खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। अफसरों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

नूरपुर थाना क्षेत्र के गांव रतनगढ़ निवासी जयप्रकाश के चार बच्चों पुत्री ऐश्वर्य (5), लोकेश उर्फ आराध्या (4), मानवी (7) व पुत्र कार्तिक (डेढ़ वर्ष) तथा उसके सगे भाई नीरज जोशी की 14 वर्ष पुत्री प्रीति बृहस्पतिवार की सुबह उल्टी दस्त होने के कारण क्षेत्र के ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। निजी चिकित्सक ने फूड प्वॉइजनिंग बताते हुए इलाज शुरू कर दिया।

बृहस्पतिवार की शाम को उपचार के दौरान लोकेश और कार्तिक की मौत हो गई। इसके बाद गंभीर हालत देखते हुए चिकित्सकों ने ऐश्वर्या और मानवी को नूरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। यहां जयप्रकाश ने बताया कि उसके और उसके भाई के बच्चे बुधवार की शाम को दाल चावल खा कर सोए थे। रात में ही सभी बच्चों को उल्टी दस्त की शिकायत होने लगी तो उन्होंने गांव के ही निजी चिकित्सक कोदिखाया था।

दो बच्चों की मौत के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने आए जिला कुष्ठ उन्मूलन अधिकारी डॉ. शैलेष जैन ने बीमार बच्चों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि बच्चों ने करीब दो दिन का बासी भोजन किया था। इससे उनकी हालत बिगड़ी है। इस दौरान मुरादाबाद से पहुंची खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे।

मृतक बच्चे अतिकुपोषित थे
नूरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अजय धर्मेश गंधर्व ने बताया कि मृतक दोनों बच्चे अतिकुपोषित थे। जयप्रकाश का परिवार बहुत गरीब है। पीएचसी की टीम ने कई बार परिजनों से अपने बच्चों को जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती कराने को कहा था। लेकिन परिजनों ने मना कर दिया था। संभवत: कुपोषण से ही बच्चों की मौत हुई है। फिलहाल मुरादाबाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम द्वारा लिए गए नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।

 
 

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