लखनऊ और अमेठी में ‘धुरंधर’ फिल्म से प्रेरित पोस्टरों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें अखिलेश यादव के शासनकाल की तुलना पाकिस्तान के ‘ल्यारी राज’ से की गई है। इन पोस्टरों में योगी आदित्यनाथ सरकार की माफिया पर कार्रवाई का उल्लेख है, जिसके जवाब में समाजवादी पार्टी ने इसे 2027 चुनावों से पहले भाजपा की हताशा बताया है।
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए बॉलीवुड फिल्म धुरंधर से प्रेरित पोस्टर लखनऊ और अमेठी के कुछ हिस्सों में लगाए गए हैं। अमेठी रेलवे स्टेशन के बाहर और विभिन्न चौराहों पर लगाए गए पोस्टरों पर नारा लिखा है, “आपको क्या चाहिए? अखिलेश का ल्यारी राज? “ल्यारी” का संदर्भ पाकिस्तान के कराची शहर के एक इलाके से है, जो कभी गिरोह हिंसा के लिए कुख्यात था और जिसका जिक्र फिल्म में भी किया गया है। ऐसा लगता है कि इस संदेश का उद्देश्य उस इलाके की छवि और समाजवादी पार्टी के नेता के कार्यकाल के बीच तुलना करना है।
इससे एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर में भी इस इलाके का उल्लेख किया गया है। होर्डिंग में एक ओर अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में हुई कथित हिंसा और दंगों का जिक्र किया गया है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में माफिया और अपराधियों पर हुई कार्रवाई का विवरण दिया गया है। होर्डिंग पर यूथ अगेंस्ट माफिया नामक संगठन का नाम भी प्रमुखता से अंकित है, साथ ही संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष, महामंत्री और प्रतापगढ़ प्रभारी के नाम व फोटो भी लगाए गए हैं। इस बीच, सपा ने ऐसे पोस्टर लगाये जाने की निंदा की है।
सपा के जिला प्रवक्ता, अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी सरकार की हताशा और निराशा का प्रमाण है। उन्होंने कहा, दीपक बुझने से पहले कई रूपों में नजर आता है। भारतीय जनता पार्टी का दीपक बुझने वाला है। भाजपा की सरकार को इस बात का एहसास हो चुका है कि अब उनकी वापसी नहीं होने वाली है इसलिए उनके वह तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। जनता सब समझती है। उधर, अमेठी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रवि सिंह ने कहा कि ऐसे पोस्टर लगाए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम को भेजा गया है और मामले की जांच की जा रही है।