‘अंत तक मराठी…’, सामना के संपादकीय में भाषा विवाद पर शिवसेना UBT ने BJP पर बोला हमला

‘अंत तक मराठी…’, सामना के संपादकीय में भाषा विवाद पर शिवसेना UBT ने BJP पर बोला हमला

महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी ने महानगरपालिका चुनाव में जीतने वाली महायुति पर एक बार फिर निशाना साधा है. अपने मुखपत्र सामना में छपे लेख में भाषाई विवाद को आधार बनाते हुए घाटकोपर श्मशान घाट के मामले का जिक्र किया है. पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में घाटकोपर श्मशान घाट में मृत्यु पंजीकरण की रसीदें गुजराती में जारी होने का आरोप लगाया गया है. इसे मराठी भाषा के अपमान से जोड़ते हुए बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं.

घाटकोपर श्मशान घाट का मामला क्या है?

संपादकीय के अनुसार मुंबई महानगरपालिका के घाटकोपर स्थित हिंदू श्मशान घाट में मृत्यु पंजीकरण की रसीदें गुजराती भाषा में जारी की जा रही हैं. जबकि महानगरपालिका के पुराने नियमों के अनुसार सभी प्रमाणपत्र मराठी और अंग्रेजी में जारी किए जाने चाहिए.

लेख में कहा गया कि कई दिनों से आधिकारिक चिह्नों वाली ये रसीदें वितरित की जा रही हैं, जिससे भाषाई विवाद खड़ा हो गया है. संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्तमान मेयर रितु तावडे कर रही हैं, इसलिए इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए.

बीजेपी पर मराठी विरोध का आरोप

सामना के संपादकीय में भाजपा पर चुनाव के दौरान मराठी प्रेम का मुखौटा पहनने और बाद में उसे उतारने का आरोप लगाया गया है. लेख में कहा गया कि अगर महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्य है, जैसा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा था, तो फिर श्मशान घाट में गुजराती रसीदें क्यों जारी हो रही हैं.

संपादकीय में यह भी लिखा गया कि रेलवे प्लेटफॉर्म, सड़कों के नाम या अन्य सरकारी कामों में गुजराती भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश मराठी भाषा के लिए खतरे के रूप में देखी जा रही है. हालांकि लेख में यह भी स्वीकार किया गया कि गुजराती भाषा और संस्कृति का देश के साहित्य, संगीत और राजनीति में बड़ा योगदान रहा है.

मराठी अस्मिता और राजनीति पर जोर

संपादकीय में दावा किया गया कि मराठी भाषा और अस्मिता की रक्षा के लिए शिवसेना ने पिछले कई दशकों से संघर्ष किया है. लेख में छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और बालासाहेब ठाकरे की भाषा के रूप में मराठी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि महाराष्ट्र की राजधानी में मराठी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

संपादकीय में यह भी कहा गया कि महाराष्ट्र में जन्म से लेकर मृत्यु तक मराठी भाषा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मराठी भाषा और पहचान को कमजोर करने की कोशिश हुई तो शिवसेना इसका विरोध जारी रखेगी.


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