वतन का यह तिरंगा ही हमारी जान है यारों
- अब कोई शाहंशाह है, न इंसाफ का हामी, क्या फायदा अद्ल की जंजीर हिला के।दिलशाद
देवबंद। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शेरी नशस्ति का आयोजन किया गया। इसमें युवा शायर तनवीर अजमल ने पढ़ा..हमारी शान है यारों, यही पहचान है यारों, वतन का यह तिरंगा ही हमारी जान है यारों सुनाकर जमकर दाद बटोरी।
रविवार को मोहल्ला लाल मस्जिद पर आयोजित शेरी नशस्ति का शुरुआत दिलशाद खुशतर की नात-ए-पाक से हुई। उस्ताद शायर शमीम किरतपुरी ने कहा..बहुत हमने तुझे ऐ दिल यह समझाया इशारे में, गजब की आग होती है मोहब्बत के शरारे में। दिलशाद खुशतर ने पढ़ा..अब कोई शाहंशाह है, न इंसाफ का हामी, क्या फायदा अद्ल की जंजीर हिला के। फिरोज खान फिरोज ने कुछ यूं कहा..दीवानगी का मुझको भी होने लगा यकीं, आता है उनके घर से जो पत्थर कभी-कभी। मुंबई से आए शायर राशिद बदर ने पढ़ा..बह रहा है नशीली आंखों से, थोड़ा काजल उधार दे दो ना। डॉ. काशिफ अख्तर ने कुछ यूं कहा..दिल के आतिश दान को मैंने यूं सुलगाया सारी रात, उसकी सारी तहरीरों को खूब जलाया सारी रात। आजम साबरी ने पढ़ा..वो कहते हैं अदावत की है मैंने, फना उस पर मोहब्बत की है मैंने सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अध्यक्षता दिलशाद खुशतर व संचालन काशिफ अख्तर ने किया। इस मौके पर मो. नदीम, यूसुफ साबरी, ईशान, गाजी, जमाली और दानियाल आदि मौजूद रहे।
