शादी को हिंदू बने युवक से सुप्रीम कोर्ट बोला- विश्वासी पति, अच्छे प्रेमी बनें और ये नेकनीयती बनी रहे

 

खास बातें

  • शीर्ष अदालत ने कहा, यदि कानून के तहत हो तो हिंदू-मुस्लिम विवाह भी स्वीकार
  • छत्तीसगढ़ के अंतरधार्मिक विवाह के मामले में युवती के पिता की याचिका पर सुनवाई
  • सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि लिव-इन रिलेशन को सुप्रीम कोर्ट मान्यता दे चुका है

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई में कहा कि वह अंतरजातीय व अंतरधार्मिक विवाह के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसे रिश्तों से समाजवाद को बढ़ावा मिलता है। हालांकि कोर्ट ने नसीहत दी कि ऐसा विवाह करने वाले को विश्वासी पति और अच्छा प्रेमी बने रहना चाहिए और नेकनीयती दिखानी चाहिए

छत्तीसगढ़ के अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े मामले में युवती के पिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह ने कहा, हम दो अलग धर्म मानने वालों की शादी के खिलाफ नहीं हैं। हिंदू-मुस्लिम विवाह भी स्वीकार है। यदि यह विवाह कानूनन वैध है तो किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। तथाकथित ऊंची जाति व निचली जाति के लोगों को भी शादी करनी चाहिए।

पीठ ने कहा कि लिव-इन रिलेशन को सुप्रीम कोर्ट मान्यता दे चुका है। हम सिर्फ युवक-युवती के हितों का संरक्षण चाहते हैं। खासकर हमारा प्रयास युवती का भविष्य सुरक्षित करना है। युवती के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह विवाह ढकोसला है। पीठ ने इस मामले को 24 सितंबर के लिए टालते हुए राज्य सरकार सहित अन्य से जवाब मांगा है।

युवती के पिता ने दी थी चुनौती

छत्तीसगढ़ के एक मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपनाकर शादी की थी। हाईकोर्ट ने इस जोड़े को साथ रहने की इजाजत दी। जिसके बाद युवती के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि यह शादी फर्जी है और यह एक रैकेट का हिस्सा है। युवती के परिजनों का दावा है कि युवक ने हिंदू धर्म अपनाकर शादी की, लेकिन बाद में वह फिर मुस्लिम बन गया।

मामला पिछले साल भी पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट

पिछले वर्ष भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट आया था। तब तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने लड़की की इच्छा को देखते हुए उसे माता-पिता के साथ रहने की इजाजत दी थी। मां-बाप के साथ रहने के दौरान पुलिस उसके घर पहुंची और युवती को साथ ले गई। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में युवती ने कहा कि वह पति के साथ रहना चाहती है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उसे पति के साथ रहने की इजाजत दे दी।
 
 

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