दिल्ली में बढ़ने वाली है जिलों की संख्या, 11 से बढ़कर होंगे 13 जिले, जानें क्या होंगे नाम
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार राजधानी के प्रशासनिक नक्शे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहर के मौजूदा 11 जिलों की संख्या को बढ़ाकर 13 करने और कई जिलों के नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शुक्रवार को अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लोगों की सुविधा के लिए और प्रशासन आसान करने के लिए इनके नाम बदलने और सीमाएं फिर से तय करने की जरूरत समझी जा रही है। बता दें कि बदलाव के बाद दिल्लीवासियों को तमाम दस्तावेजों में अपने जिलों के नए नाम देखने को मिल सकते हैं।
क्या होंगे दिल्ली के 13 नए जिलों के नाम?
राजस्व विभाग के ड्राफ्ट प्लान के मुताबिक, दिल्ली के 13 नए जिलों के नाम इस प्रकार होंगे:
- सिविल लाइंस
- करोल बाग
- रोहिणी
- नरेला
- नजफगढ़
- सिटी सदर
- केशवपुरम
- नॉर्थ शाहदरा
- साउथ शाहदरा
- सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट
- नई दिल्ली
- साउथ डिस्ट्रिक्ट
- वेस्ट डिस्ट्रिक्ट
बता दें कि फिलहाल दिल्ली के ज्यादातर जिले अपनी भौगोलिक स्थिति के हिसाब से नाम रखते हैं, जैसे ईस्ट दिल्ली, वेस्ट दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, साउथ दिल्ली, साउथ-ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली, साउथ-वेस्ट दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली और न्यू दिल्ली। सिर्फ शाहदरा को छोड़कर बाकी सभी दिशा-आधारित नाम हैं।
क्यों बदले जा रहे हैं जिलों के नाम?
अधिकारियों के अनुसार, जिलों के नाम बदलने और सीमाएं फिर से तय करने का मकसद यह है कि जिलों की प्रशासनिक सीमाएं और नगर निगम के जोन की सीमाएं एक-दूसरे से पूरी तरह मिल जाएं। इससे प्रशासन का काम आसान होगा और लोगों को काम कराने में सुविधा होगी। सबसे ज्यादा आबादी वाले नॉर्थ-ईस्ट और ईस्ट जिले को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है, नॉर्थ शाहदरा और साउथ शाहदरा। लुटियंस दिल्ली कहे जाने वाले न्यू दिल्ली जिले में बहुत कम बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके तीन सब-डिवीजन दिल्ली कैंट, वसंत विहार और चाणक्यपुरी हैं। इन्हें दो सब-डिवीजन में फिर से जोड़ा जाएगा दिल्ली कैंट और न्यू दिल्ली। वसंत विहार सब-डिवीजन के इलाकों को नजफगढ़ जिले में मिलाने की सिफारिश की गई है।
कब तक अस्तित्व में आएंगे नए जिले?
यह पूरा प्रस्ताव पहले दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी लेगा, फिर उपराज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही लागू होगा। यानी कि ये सारी कवायद पूरी होने के बाद ही नए जिले अस्तित्व में आएंगे। दिल्लीवासियों को इस बदलाव के चलते आने वाले दिनों में सरकारी दफ्तरों, वोटर लिस्ट, आधार कार्ड, राशन कार्ड और दूसरे कागजातों में नए जिले का नाम देखने को मिल सकता है। प्रशासन का दावा है कि इससे कामकाज में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
