45 मिनट की देरी भारी पड़ी, फायर ब्रिगेड समय पर आती तो बच सकती थीं 7 जानें; बच्चों को पहली मंजिल से फेंककर बचाया

45 मिनट की देरी भारी पड़ी, फायर ब्रिगेड समय पर आती तो बच सकती थीं 7 जानें; बच्चों को पहली मंजिल से फेंककर बचाया

दिल्ली। पालम के साध नगर में बुधवार सुबह लगी आग ने एक परिवार को उजाड़ दिया। चार मंजिला इमारत में लगी आग के बीच जब धुआं तेजी से फैला तो अंदर फंसे लोगों की जान बचाने के लिए परिवार के सदस्य जान जोखिम में डालकर जूझते रहे।

इसी दौरान एक से दो साल के बीच दो छोटे बच्चों को बचाने के लिए उन्हें पहली मंजिल से नीचे फेंका गया, जहां नीचे खड़े लोगों ने उन बच्चों को संभाला, जिसके बाद दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

यह दर्दनाक हादसा पालम थाना क्षेत्र के साध नगर स्थित राम चौक बाजार में हुआ। यहां राजेंद्र कश्यप की चार मंजिला इमारत ‘प्रवेश बिल्डिंग’ में भूतल पर कॉस्मेटिक सामान का शोरूम है, जबकि ऊपर की मंजिलों पर परिवार रहता है।

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सुबह सोते समय लगी आग

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6:40 बजे अचानक इमारत में आग लग गई। उस समय अधिकांश लोग सो रहे थे। देखते ही देखते धुआं पूरे मकान में फैल गया और अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन परिवार के 9 लोग अंदर ही फंस गए।

बच्चों को नीचे फेंककर बचाई जान

आग और धुएं के बीच हालात बिगड़ते देख राजेंद्र के बेटे प्रवेश ने साहस दिखाते हुए एक साल की बच्ची और एक बच्चे को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। नीचे मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चों को संभाला और पास के अस्पताल पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान छोटी बच्ची के फ्रैक्चर हुआ है, जबकि बच्चा झुलसा गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक और बच्चा इस दौरान हाथ से फिसल गया था, लेकिन उसे बचा लिया गया। उसके सिर में चोट आई है।

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परिवार के कई सदस्य फंसे रह गए

जानकारी के अनुसार इमारत में प्रवेश की मां, पत्नी, भाभी, बहन और दो छोटे बच्चे अंदर फंस गए थे। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दमकलकर्मियों के पहुंचने के बावजूद शुरुआती समय में अंदर फंसे लोगों तक पहुंच पाना मुश्किल हो गया।

कूलिंग के साथ जारी है तलाशी

दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है। फिलहाल इमारत में कूलिंग का काम चल रहा है और अंदर फंसे लोगों की तलाश के लिए तलाशी अभियान जारी है। अब तक इस हादसे में पांच लोगों के शव निकाले जा चुके हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इमारत में और कितने लोग फंसे हो सकते हैं, इसकी सही जानकारी तलाशी पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगी।

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जल्दी आ जाती फायर ब्रिगेड को बच जाती जान

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सबसे बड़ी दिक्कत फायर ब्रिगेड की रही, अगर जल्दी आ जाती लोगों की जान बच जाती। लाेगों ने बताया कि फायर ब्रिग्रेड को आने में करीब 40 से 45 मिनट की देरी हुई।


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