………….हर मुखड़े पर खिल उठे, देश प्रेम के रंग
- सहारनपुर में काव्य पाठ करते कविगण।
सहारनपुर। साहित्यिक संस्था विभावरी’ द्वारा होली के रंग कविताओं के संग’ कार्यक्रम का आयोजन संस्था उपाध्यक्ष प्रत्यूष जैन के कोर्ट रोड स्थित आवास पर किया गया। मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा डॉ. आर. पी. सारस्वत की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
कवि वीरेश त्यागी ने कुछ यूुं कहा- ‘होली जले विकार की, राम-नाम के संगध्तन-मन श्री रघुनाथ के, रँग में डालो रंग’। विनोद भृंग ने पढ़ा, ‘ऐसी होली खेलना, मित्र जनों के संगध्हर मुखड़े पर खिल उठे, देश प्रेम के रंग’। संस्था अध्यक्ष डॉ राम विनय शर्मा का अंदाज कुछ ऐसा रहा, ’झमक रहे हैं रंग, संग मदमाती नारीध्चढ़ आया यौवन फागुन पर भीगी सारी’। डॉ.वीरेन्द्र आजम ने इस अंदाज मे ंरंग बिखेरा-‘होली लायो रंग उमंग, मनवा ओढे टेसू रंगध्भीगे आंचल भीगे अंग, नाचे सारे खुशियों संग…….फागुन आयो रे’। हरिराम पथिक की कविता देखिए -‘उमंगों में नए सपने, सजाने आ गई होली/हँसाने के, रुलाने के, बहाने आ गई होली‘। संस्था सचिव डॉ विजेंद्र पाल शर्मा ने होली का महत्व कुछ यूं समझाया-‘होली में जलते नहीं, मन के अगर मलाल तो फिर मित्रों व्यर्थ हैं, रंग, अबीर, गुलाल।’ अध्यक्षता कर रहे गोकरण दत्त शर्मा ने पढ़ा-‘ रंगीलों फागुन आयो रे, नशीलों फागुन आयो रेध् मनवा तन को रहा झकझोर रंगीलों फागुन आयो रे। नरेंद्र मस्ताना का गीत जमकर सराहा गया- ‘यू पी में तो योगी बाबा, जमकर ठोक रहे हैं ताल/जमकर ठोक रहे हैं ताल, कोई कर ना सके बवाल’। खूब पसंद किया गया। डॉ.आर पी सारस्वत के भाव देखिए-‘लगे हुए हैं हम जीवन को व्यर्थ गंवाने मेंध्नश्वर काया नगरी के घर द्वार सजाने में। समन्वय की ओर से डॉ. आर. पी. सारस्वत ने पत्रकारिता के 50 वर्ष पूर्ण होने पर डॉ. वीरेन्द्र आजम का माल्यार्पण कर स्वागत किया। फूलों की होली के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। संचालन डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने किया।
