लखनऊ। कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा के हत्यारोपित शूटर विजय यादव को असलहा और शरण देने वाला बिल्डर भी पुलिस के रडार पर है। वह गोमतीनगर विस्तार में कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाता है। उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। लॉरेंस विश्नोई ग्रुप से असलहा तस्करी में भी बिल्डर का नाम आया था। जिसके बाद खुफिया एजेंसियों ने उसके यहां छापेमारी की थी। लखनऊ और आस पड़ोस के जिलों में असलहों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क है।

जीवा की पेशी पर रेकी

कोर्ट में जीवा की पेशी पर रेकी कराने में भी बिल्डर ने विजय यादव की मदद कराई थी। विजय, बिल्डर की ही कंस्ट्रकशन कंपनी में नौकरी भी करता था और उसी के यहां रहता था। जांच में लगी पुलिस टीम अब बिल्डर की कंपनी के बारे में जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही उससे विजय यादव के कनेक्शन खंगाल रही है।

मोबाइल के वाट्सएप मैसेज की पड़ताल हो रही है

उधर, साइबर फोरेंसिक लैब में शूटर विजय के मोबाइल की पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही हत्या की वजह और विजय के पीछे और कौन है, जो जीवा की हत्या कराना चाहता था। माफिया मुख्तार अंसारी के शूटर जीवा की हत्या से पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र में किसको फायदा था, पुलिस टीमें अब यह ब्योरा जुटा रही हैं। मोबाइल के वाट्सएप मैसेज की पड़ताल में टीमें लगी हैं। हालांकि अभी फोरेंसिक टीम भी मोबाइल से कोई डाटा रिकवर नहीं कर पाई है। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि बिल्डर ने ही लॉरेंस ग्रुप से विजय यादव को हरियाणा से मैग्नम अल्फा रिवाल्वर हरियाणा से दिलाई थी।

कैटरिंग के काम के दौरान दोनों की हुई थी मुलाकात

बिल्डर की मिठाई की दुकान थी। वहीं, विजय यादव के पिता श्यामा यादव की आजमगढ़ देवगांव में मिठाई की दुकान है। वर्ष 2016 में मिठाई की दुकान का काम विजय यादव भी देखता था। बिल्डर को एक कैटरिंग का काम मिला था, जिसमें विजय यादव को काम करने के लिए भी बुलाया था। विजय और बिल्डर की वहीं मुलाकात हुई थी।

विजय यादव एक नाबालिग लड़की को लेकर भागा

मुलाकात के दौरान ही तेज तर्रार अपराधिक प्रवृत्ति का विजय यादव, बिल्डर की नजर में चढ़ गया था। इसी बीच विजय यादव एक नाबालिग लड़की को लेकर भागा। लड़की के परिवारजन ने विजय के खिलाफ छेड़छाड़ और पाक्सो की धारा में मुकदमा देवगांव थाने में दर्ज कराया था। इस मामले में बाद में दोनों पक्षों का समझौता हो गया था। समझौते में भी बताया जा रहा है कि बिल्डर ने विजय यादव की मदद की थी।