वायुसेना प्रमुख बोले- हम 44 साल पुराने मिग-21 उड़ा रहे हैं, इतनी पुरानी तो कोई कार भी नहीं चलाता

 

खास बातें

  • दिल्ली में एयरफोर्स ऑडिटोरियम में वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण को लेकर हुआ सेमिनार
  • धनोआ ने कहा कि हम पुराने हो चुके लड़ाकू उपकरणों को बदलने का इंतजार नहीं कर सकते
  • रक्षा मंत्री ने कहा कि बालाकोट हमले के बाद दुनिया ने भारतीय वायुसेना का लोहा माना है

भारतीय वायुसेना के पास अगले महीने लड़ाकू विमान ‘राफेल’ की पहली खेप आ जाएगी, जबकि 2022 तक 36 राफेल विमान सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा। वहीं आने वाले समय में 114 लड़ाकू विमान भी वायुसेना के पास होंगे, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुका है। हालांकि वर्तमान स्थिति यह है कि वायुसेना अब भी काफी पुराने मिग-21 विमान उड़ा रही है। दिल्ली में एयरफोर्स ऑडिटोरियम में हो रहे सेमिनार में वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस स्थिति पर तंज कसा।

सैकड़ों दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके मिग-21 लड़ाकू विमान पर वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हम अब भी 44 साल पुराने मिग-21 चला रहे हैं, जबकि इतने साल बाद कोई अपनी कार तक नहीं चलाता। इंजीनियरों के रख-रखाव और मेहनत के कारण ऐसा संभव हो पा रहा है। वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण को लेकर हो रहे सेमिनार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में एयरचीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना का मिग 21 विमान चार दशक से ज्यादा पुराना हो गया है, लेकिन अभी भी यह सेना की रीढ़ बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद ही कोई देश इतना पुराना लड़ाकू विमान उड़ाता है। हमारे पास इसका विकल्प भी नहीं है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना पूरे दमखम के साथ इसके भरोसे न केवल सरहद की हिफाजत करती है बल्कि दुश्मन की चुनौतियों का जवाब भी देती है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना एक पेशेवर वायुसेना है, बालाकोट हमले के बाद दुनिया ने हमारा लोहा माना है।

एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि हम स्वदेशी तकनीक द्वारा पुराने हो चुके लड़ाकू उपकरणों को बदलने का इंतजार नहीं कर सकते, न ही हर रक्षा उपकरण को विदेश से आयात करना समझदारी होगी। हम अपने पुराने हो चुके हथियारों को स्वदेश निर्मित हथियारों से बदल रहे हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव पर उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना हमेशा से सतर्क रहती है। ऐसा नहीं है कि तनाव हुआ है तभी हम सतर्क हैं। एयर डिफेंस सिस्टम की जिम्मेदारी हमारी है और हम सतर्क हैं।

 
 
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