‘जो साधु बनकर बैठा है…’, CM योगी के कालनेमि वाले बयान पर भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
प्रयागराज माघ मेले में विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का हठ जारी है. इसी क्रम में आज बसंत पंचमी पर्व के मौके पर भी वो आज संगम में स्नान करने नहीं जाएंगे. उन्होंने साफ कहा कि हम पहले जैसे स्नान करने जाते थे वैसे ही सम्मान के साथ जाएंगे. वहीं उन्होंने सीएम योगी को ही कालनेमि कहकर बुलाया.
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शकंराचार्य अवमुक्तेश्वरानंद से बसंत पंचमी पर स्नान का अनुरोध किया था. इसे लेकर जब एबीपी न्यूज़ ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से बात की तो उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने उन्हें राहत दी है लेकिन, सीएम योगी के बयान में कालनेमि का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने सीएम को ही कालनेमि बता दिया.
सीएम योगी को ही बता दिया कालनेमि
शंकराचार्य ने कहा कि जो मानहानि सीएम और अधिकारियों द्वारा की गई, उस पर केशव मौर्य ने कुछ नहीं कहा. हालांकि ये अच्छा लगा कि किसी ने सोचा तो सही. लेकिन, जो स्वंय कालनेमि बनकर बैठा है, वो कुछ नहीं कर रहा है. ये सोच अच्छी है कि किसी व्यक्ति ने सोचा कि इस विवाद का पटाक्षेप होना चाहिए. ये कालनेमि का वक्तव्य दे रहे हैं, राक्षस था, साधु बनकर बैठा था. साधु का वेश धरकर आए और कहा कि गो हत्या बंद करेंगे. लेकिन, 12 साल से सत्ता में हैं और गोहत्या बंद नहीं की. कालनेमि तो यही हुए.
शंकराचार्य ने योगी सरकार पर साधा निशाना
उन्होंने आगे कहा कि हम लोग सदा अच्छा ही सोचते हैं. देश की जनता को कुंभ और माघ मेले का इतिहास तो पता चल रहा है. लोगों को लगने लगा था कि मोदी जी और योगी जी के आने के बाद से मेला लगने लगा. इतिहास पढ़ने पर पता चला कि मुगल यहां सेना लगा चुके थे. शंकराचार्य ने पेशवाओं के साथ आक्रमण किया और सनातनियों के साथ स्नान किया.
उसके बाद से उन्होंने हर साल यहां आने का नियम बनाया. उन्होंने हिम्मत दिखाई. जिन शंकराचार्यों ने माघ मेला शुरू किया, उनके रथ को रोक रहे हो. आज की सरकार शंकराचार्य के योगदान को विखंडित करना चाहती है. वो चाहती है कि शंकराचार्य उनके कार्यकर्ता बन जाएं.
शंकराचार्य विवाद को लेकर हुई चौपाल
वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य विवाद को लेकर माघ मेला में आए श्रद्धालुओं के साथ चौपाल भी की गई. इसमें कुछ लोगों ने कहा कि दोनों लोग को बीच का रास्ता निकाल लेना चाहिए तो और इतना विवाद नहीं बढ़ना चाहिए था, वहीं कुछ ने कहा कि शंकराचार्य के साथ गलत हुआ.
लोगों का कहना है कि शंकराचार्य के बटुकों के साथ गलत हुआ जिस तरीके से उनके शिखा खींची गई वो ग़लत है. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि शंकराचार्य ने गलत किया और उनको पुलिस की बात मान लेनी चाहिए थी और उनको पैदल जाना चाहिए था अगर वो ये करेंगे तो ऐसी स्थितियां उत्पन्न होनी हैं. कुछ ने तो उन्हें कांग्रेसी तक बता दिया.
