शोभित विश्वविद्यालय स्पिक-मैके हेरिटेज क्लब द्वारा प्रसिद्ध कलाकार सितार वादक श्री गौरव मजूमदार के कार्यक्रम का शानदार आयोजन

शोभित विश्वविद्यालय स्पिक-मैके हेरिटेज क्लब द्वारा प्रसिद्ध कलाकार सितार वादक श्री गौरव मजूमदार के कार्यक्रम का शानदार आयोजन

गंगोह : दिनाँक 17-03-2026 दिन मंगलवार को शोभित विश्वविद्यालय स्पिक–मैके हेरिटेज क्लब ने स्पिक–मैके भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय श्रृंखला के अंतर्गत श्री जे.पी माथुर ऑडिटोरियम में प्रसिद्ध कलाकार श्री गौरव मजूमदार की प्रस्तुति से सितार वादन का शानदार आयोजन किया। जिसमे श्री शंकर देवनाथ ने तबले के द्वारा सितार वादक श्री गौरव मजूमदार जी का साथ दिया। यह कार्यक्रम छात्रों और संकाय सदस्यों के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत और विरासत को बढ़ावा देने के लिए क्लब की पहल का एक हिस्सा था।

कार्यक्रम का उद्घाटन परंपरागत विधि से कुलपति प्रो.(डॉ.) रणजीत सिंह, कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महिपाल सिंह और कलाकारों द्वारा औपचारिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। एसयू स्पिक-मैके हेरिटेज क्लब के समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार ने कलाकार और कार्यक्रम के उद्देश्यों का परिचय देते हुए स्वागत भाषण दिया और बताया कि श्री गौरव मजूमदार जी एक सितार वादक और महान पंडित रविशंकर के शिष्य हैं। श्री गौरव मजूमदार इलाहाबाद (भारत) के एक प्रतिष्ठित संगीतकार परिवार से आते हैं। संगीत में उनका प्रारंभिक सफर गायन से शुरू हुआ, जिसके बाद उन्होंने वायलिन बजाना सीखा। एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका सहित दुनिया भर के विभिन्न संगीत समारोहों और संगीत स्थलों पर गौरव के प्रदर्शन और कार्यों की व्यापक रूप से सराहना की गई है। उन्होंने डैनियल होप, फिलिप ग्लास और केनी वर्नर जैसे पश्चिमी संगीतकारों के साथ कई सहयोग किए हैं और इंग्लिश चैंबर ऑर्केस्ट्रा के लिए संगीत तैयार किया है और उसके साथ प्रदर्शन किया है। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता हरमन हेस द्वारा लिखित बैले ‘सिद्धार्थ’ के लिए संगीत तैयार किया है और नव सहस्राब्दी के जश्न के लिए वेटिकन में आयोजित अपने संगीत कार्यक्रम के लिए ‘आकांक्षा’ नामक एक रचना तैयार की है – वेटिकन में प्रदर्शन करने वाले वे पहले और एकमात्र भारतीय संगीतकार हैं। फ़ीचर फ़िल्म ‘शावेट’ के लिए उनका हालिया काम एक अलग शैली और प्रकार के संगीत के निर्माण की दिशा में एक और कदम है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री गौरव मजूमदार का मनमोहक प्रदर्शन था। सितार और तबले की मनमोहक जुगलबंदी ने पूरे सभागार को सुरों की दिव्य गरिमा और सांगीतिक वातावरण से सराबोर कर दिया, जिससे उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। प्रदर्शन के बाद एक संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र हुआ, जिसमें छात्र और उपस्थित लोगों ने कलाकार के साथ बातचीत की और भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर कुलपति प्रो.(डॉ.) रणजीत सिंह एवं कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महिपाल सिंह ने कार्यक्रम के आयोजकों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। कार्यक्रम में कुलपति प्रो.(डॉ.) रणजीत सिंह ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अविभाज्य हिस्सा है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं, मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में सार्थक भूमिका निभाते हैं। कला एवं संगीत मानसिक संतुलन, आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा एकाग्रता के विकास में सहायक एक सशक्त साधन है।

कलाकार के योगदान का सम्मान करने के लिए, विश्वविद्यालय द्वारा एक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया और उसके बाद समन्वयक प्रो.(डॉ.) प्रशांत कुमार द्वारा सभी का हार्दिक धन्यवाद दिया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

कार्यक्रम में क्लब के सदस्य करुणा अग्रवाल, आयुषी अग्रवाल, वॉलंटियर गरिमा, देवांगी, चारु, अमान अब्बास, श्रुति, सृष्टि, अंशिका आदि का सक्रिय सहयोग रहा।

इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रो.(डॉ.) गुंजन अग्रवाल, डॉ. अनिल रॉयल, डॉ. नमित वशिष्ठ, डॉ. परमेश्वरम, डॉ. अखिल, डॉ. अरुण बाबू, वित्त-लेखा अधिकारी जसवीर सिंह आदि शिक्षकगण उपस्थित रहे।


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