शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च विश्वविद्यालय, जयपुर ने हेल्थ मैनेजमेंट और उससे जुड़े क्षेत्रों में एकेडमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च विश्वविद्यालय, जयपुर ने हेल्थ मैनेजमेंट और उससे जुड़े क्षेत्रों में एकेडमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

गंगोह : स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संबंधित क्षेत्रों में शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने, अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च विश्वविद्यालय (जयपुर) ने 15 मार्च, 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करना, फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रमों को नई गति प्रदान करना, छात्र-केंद्रित सहभागिता को सुदृढ़ करना तथा विविध शैक्षणिक पहलों के माध्यम से पारस्परिक सहयोग को और अधिक सशक्त बनाना है। इस साझेदारी के अंतर्गत दोनों संस्थान ज्ञान एवं संसाधनों के प्रभावी आदान-प्रदान पर विशेष बल देंगे, जिससे शिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सके। इस क्रम में दोनों संस्थान संयुक्त रूप से वर्कशॉप, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का नियमित आयोजन करेंगे।

शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह से, माननीय कुलपति प्रो.(डॉ.) रणजीत सिंह द्वारा इस मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए गए, तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च विश्वविद्यालय (जयपुर) की ओर से प्रेसिडेंट डॉ. पी. आर. सोदानी द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग के माध्यम से दोनों संस्थानों का लक्ष्य नवाचार को बढ़ावा देना, क्षमता निर्माण को नई दिशा प्रदान करना तथा बहुविषयक शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सार्थक प्रगति सुनिश्चित करना है।

इस अवसर पर बोलते हुए, दोनों विश्वविद्यालयों के नेतृत्व ने आशा व्यक्त की कि यह साझेदारी उल्लिखित लक्ष्यों के अनुरूप विकास, शैक्षणिक संवर्धन और अनुसंधान उत्कृष्टता में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह साझेदारी सहयोगी शिक्षा, समग्र शिक्षा की संस्कृति बनाने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जिससे न केवल दोनों विश्वविद्यालयों के छात्रों और संकाय को बल्कि व्यापक शैक्षणिक और अनुसंधान समुदाय को भी लाभ होगा।


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