पुस्तकों की ज्ञान, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार में अहम भूमिका: शीतल टण्डन

पुस्तकों की ज्ञान, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार में अहम भूमिका: शीतल टण्डन
  • सहारनपुर में सिटी मैजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी व डिप्टी कलेक्टर हेमंत पेटल को पुस्तक भेंट करते व्यापारी प्रतिनिधि।

सहारनपुर [24CN]। उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल की जिला इकाई द्वारा विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सिटी मैजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी व डिप्टी कलेक्टर हेमंत पेटल को पुस्तक भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। दोनों अधिकारियों द्वरा व्यापारी प्रतिनिधियों के पुस्तकों के प्रति प्रेम की सराहना की गयी।

रेलवे रोड़ स्थिति उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल की जिला इकाई के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन व जिला संयोजक कर्नल संजय मिड्ढा ने संयुक्त रूप से कहा कि कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं तथा इससे ज्ञान अर्जन तथा मार्गदर्शन करने एवं परामर्श देने में विशेष भूमिका निभाती है साथ ही पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, चारित्रिक, धार्मिक एवं व्यवयायिक विकास में सहायक होती है तथा किसी भी देश व सभी प्रकार के ज्ञान, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण व प्रचार प्रसार में पुस्तकें सहायक होती है, क्योंकि इसी से ही प्राचीनकाल के बारे में जानने का सबसे अच्छा स्रोत निहित है। वैदिक साहित्यों से हमें उस काल के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक पहलुओं की जानकारी मिलती है। विश्व की हर सभ्यता के विकास में पुस्तकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

श्री टण्डन ने कहा कि उच्च उद्देश्य, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा विकास की भावना से प्रेरित 193 सदस्यीय देश तथा 6 सहयोगी सदस्यों की संस्था यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक तथा स्वामित्व (कापी राइट) दिवस का औपचारिक शुभारंभ 23 अप्रैल 1995 को हुआ था। उन्होंने कहा कि पुस्तक भेंट करने की परम्परा मध्यकाल से चल रही है और विश्व के महान लेखक विलियम शेक्सपीयर व अन्य लेखकों की स्मृति में विश्व पुस्तक तथा कापी राइट दिवस का आयोजन की शुरूआत की गयी। उन्होंने कहा कि अपने मित्रों व शुभचिंतकों को पुस्तकर उपहार में देना सबसे श्रेष्ठ कार्य है।

हालांकि इण्टरनेट के बढ़ते प्रयोग के कारण अब पुस्तकों के इंटरनेट संस्करण भी उपलब्ध होने लगे हैं, इसके बावजूद भी दुनिया की सभी भाषाओं मेें करोड़ों पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिसके अंतर्गत विज्ञान, इतिहास, प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर, संचार, व्यापार, उद्योग, खेल कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, फिल्म, भूगोल, राजनीति, भाषा, साहित्य, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र इत्यादि जिस विषय पर भी पाठक पुस्तक चाहता हैं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती हैं, जिस प्रकार सच्चा साथी मनुष्य की सहायता करता है, उसी प्रकार पुस्तकें मनुष्य के लिए हमेशा लाभप्रद होती हैं।

बैठक में श्री टण्डन द्वारा उनके द्वारा संकलित पुस्तक महापुरूषों के ‘अनमोल वचनÓ भी बैठक में उपस्थित सदस्यों को भेंट किये गये। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन, जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, जिला कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मेजर एस. के.सूरी, पवन कुमार गोयल, रमेश डावर, कर्नल संजय मिड्ढा, संदीप सिंघल आदि व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।