शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का राजधानी में बड़ा कार्यक्रम, असली-नकली संतों की होगी पहचान
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय (गोप जी) ने अयोध्या में मीडिया से बातचीत की. मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के हिंदुत्व की परिभाषा संतों पर अत्याचार और गोहत्या जैसे मुद्दों पर मौन रहने तक सीमित हो गई है.
देवेंद्र पांडेय ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लंबे समय से सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए आंदोलन करते रहे हैं. गंगा के अविरल और निर्मल प्रवाह, रामसेतु की रक्षा, मंदिर-मठों के संरक्षण और गणेश विसर्जन पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ भी शंकराचार्य ने आवाज उठाई. इस दौरान आंदोलन के समय उन पर लाठीचार्ज भी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा.
‘सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ आंदोलन’
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत उन सरकारों और लोगों के खिलाफ प्रमाण के आधार पर आंदोलन किया जा रहा है, जो भगवा भेष धारण करके सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने, मंदिरों को तोड़ने और गोहत्या को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं.
‘कार्यक्रम में असली और नकली संतों की होगी पहचान’
देवेंद्र पांडेय ने बताया कि इसी अभियान के तहत 11 मार्च को लखनऊ में एक विशेष आयोजन किया जाएगा. इस कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया जाएगा कि सनातन परंपरा में असली और नकली संत कौन हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि ऋषि-मुनियों के भेष में “कालनेमि” घूम रहे हैं, इसलिए इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा.
अयोध्या के संतों से की गई अपील
उन्होंने कहा कि इसी अभियान के तहत वे अयोध्या आए हैं और यहां के संतों से सनातन धर्म, गंगा, गौमाता और दंडी संन्यासी परंपरा की रक्षा के लिए सहयोग की अपील कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने अयोध्या के संत समाज से शंकराचार्य के इस अभियान में साथ खड़े होने का आग्रह किया है.
