बिहार की सियायत में शाहनवाज हुसैन की धमाकेदार एंट्री – BJP ने चला बड़ा दांव, राज्य में पार्टी को मिला चेहरा
पटना । भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार शाहनवाज हुसैन बिहार से पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरा भी हैं। पहली बार ही किशनगंज से लोकसभा चुनाव जीतकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनाए गए शाहनवाज को बिहार विधान परिषद के लिए प्रत्याशी बनाना बीजेपी का कोई सामान्य फैसला नहीं है। इसे पार्टी का कोई बड़ा और दूरगामी दांव माना जा रहा है। शाहनवाज को लेकर बीजेपी की दूरगामी राजनीति तो अभी भविष्य की बात है, लेकिन फिलहाल उसने गत बिहार विधानसभा चनाव में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं देने के कारण मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज कर दिया है। साथ ही पार्टी ने बिहार में अपना बड़ा चेहरा भी दिया है।
संसदीय राजनीति के हाशिए पर थे शाहनवाज
शाहनवाज हुसैन पहली बार बीजेपी के टिकट पर किशनगंज से लोकसभा चुनाव जीते थे। तत्कालीन बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें युवा मामलों का मंत्री बनाया गया। आगे 2001 में उन्हें कोयला मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला, फिर 2003 में टेक्सटाइल मंत्री बनाए गए। वे देश के सबसे युवा कैबिनेट मंत्री भी रहे। आगे साल 2004 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने 2006 में भागलपुर लोकसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भी वे जीते। इसके बाद शाहनवाज हुसैन की संसदीय राजनीति को ग्रहण लग गया। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए। आगे 2019 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर की उनकी सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) में बीजेपी के सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कोटे में चली गई।
मुस्लिम नेता को एमएलसी बनाना चाहती बीजेपी
साल 2014 से संसदीय राजनीति के हाशिए पर रहने के बावजूद शाहनवाज बीजेपी के बड़े मुस्लिम चेहरा बने रहे हैं। उन्हें बिहार विधान परिषद का प्रत्याशी बनाने के निहितार्थ क्या हैं, इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। चर्चा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं देने के कारण आलोचना का केंद्र बनी बीजेपी एक मुस्लिम नेता को विधान परिषद भेज कर भरपाई करना चाहती है।
बीजेपी ने नीतीश कुमार पर भी बढ़ा दिया दबाव
शाहनवाज को विधान परिषद भेज कर बीजेपी ने एनडीए के अपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अल्पसंख्यक राजनीति करने वाले नीतीश कुमार के जेडीयू से कोई मुस्लिम प्रत्याशी विधानसभा नहीं पहुंच सका है।
शाहनवाज के बहाने बीजेपी की दूरगामी रणनीति
फिर भी यह सवाल तो खड़ा ही है कि शाहनवाज हुसैन जैसे बड़े कद के राष्ट्रीय नेता को बिहार में एमएलसी बनाने के पीछे बीजेपी की क्या रणनीति है? शाहनवाज बीजेपी में लंबे सयम तक हाशिए पर रहे, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी वफादारी कायम रही। बीते दिनों जम्मू-कश्मीर निकाय चुनाव में बतौर प्रभारी, उनके नेतृत्व में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। माना जा रहा है कि शाहनवाज हुसैन को बिहार में एमएलसी बना कर इसका पुरस्कार देने की दूरगामी रणनीति बनाई गई है।
मजबूती की दिशा में सधे कदमों से बढ़ रही बीजेपी
शाहनवाज को सुशील मोदी के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट पर प्रत्याशी बनाया गया है। एमएलसी बनने के बाद उनकी नीतीश कुमार के कैबिनेट में एंट्री भी तय मानी जा रही है। बिहार बीजेपी में वे बीजेपी के चेहरा भी बनेंगे, यह तय लग रहा है। बीजेपी बिहार में मजबूती की दिशा में सधे कदमों से धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। बीजेपी प्रवक्ता संजय टाइगर कहते हैं कि शाहनवाज हुसैन जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता के रहने से बिहार में पार्टी को मजबूती मिलेगी। बीजेपी के कई अन्य नेताओं ने इसे पार्टी की मुस्लिम विरोधी छवि से उबरने का भी कदम बताया।
नीतीश कुमार की वजह से मुस्लिम वोट मिले: जेडीयू
शाहनवाज को लेकर एनडीए में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने सधी प्रतिक्रिया दी है। जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर मानते हैं कि शाहनवाज के आने से बिहार में एनडीए काे मजबूती मिलेगी। इससे मुस्लिम समुदाय में अच्छा संदेश भी जाएगा। हालांकि, वे यह कहना नहीं भूलते कि एनडीए को नीतीश कुमार की वजह से मुस्लिम वोट मिले थे।
शाहनवाज की बिहार में सक्रिय एंट्री पर विपक्ष की भी नजर
बिहार की राजनीति में शाहनवाज की सक्रिय एंट्री पर विपक्ष की भी नजर है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) व कांग्रेस (Congress) बीजेपी को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं। आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति यादव कहते हैं कि बीजेपी को मुस्लिम समुदाय के लोग समझते हैं। वैसे भी शाहनवाज को केंद्र की राजनीति से बिहार में सीमित कर देना उनके कद को घटाना है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा भी इसे शाहनवाज के कद को घटना मानते हैं।