नई दिल्ली। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री चयनित होने के बाद पीएमएल (एन) के नेता शहबाज शरीफ ने वहां की नेशनल असेंबली में दिए गए अपने पहले भाषण में अपने कार्यकाल में भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की सारी संभावनाओं पर एक तरफ से पानी फेर दिया है। उन्होंने ना सिर्फ कश्मीर के मुद्दे को खूब बढ़ चढ़ कर हवा देने की कोशिश की है बल्कि भारत के साथ अपने रिश्तों के भविष्य को सीधे तौर पर कश्मीर से जोड़ने की बात कही है। उन्होंने चीन के साथ पाकिस्तान के रिश्तों को भी कयामत तक जारी रखने की बात करते हुए यह साफ कर दिया है कि सत्ता में बदलाव के बावजूद दोनो देशों के रिश्तों में कोई बदलाव आना संभव नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारत आतंक मुक्त क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, ताकि हम अपनी विकास चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने लोगों की भलाई और समृद्धि सुनिश्चित कर सकें।
सबसे अंत में भारत का जिक्र किया
नेशनल असेंबली में शहबाज शरीफ ने चीन, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, यूएई, अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन जैसे देशों के साथ अपने देश के रिश्तों का उल्लेख करने के बाद अंत में भारत का जिक्र किया। उन्होंन कहा कि भारत व पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क हैं लेकिन बदकिस्मती से रिश्ते काफी खराब रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि नवाज शरीफ जब भी सत्ता में होते हैं तो भारत के साथ रिश्ते सुधरते हैं लेकिन साथ यह भी याद दिलाया कि जब भारत ने पांच परमाणु विस्फोट किये तो पाकिस्तान ने छह परमाणु विस्फोट कर भारत के दांत खट्टे कर दिये। इसके बाद उन्होंने अगस्त, 2019 में भारत की तरफ से कश्मीर से अनुच्छेद -370 खत्म करने का जिक्र किया और इसके खिलाफ काम नहीं करने के लिए पूर्व पीएम इमरान खान को कठघरे में खड़ा किया।
नए पीएम ने भारत के साथ रिश्तों को कश्मीर से जोड़ा
शरीफ ने कहा कि, आज कश्मीर में रोजाना हिंदुस्तान की तरफ से कश्मीरी भाइयों व बहनों का खून बहाया जा रहा है। हम भारत के साथ ताल्लुकात सुधारना चाहते हैं, लेकिन यह कश्मीर में अमन शांति किये बिना और कश्मीर मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र व वहां कश्मीरियों की इच्छा से हल निकाले बिना नहीं हो सकता।
पीएम मोदी से की अपील
पाक के नए पीएम ने ऐलान किया कि पाकिस्तान हर मंच पर कश्मीर का मुद्दा और कश्मीर के अवाम का मुद्दा उठाता रहेगा। कश्मीरियों को कूटनीतिक व नैतिक समर्थन दिया जाता रहेगा। आगे पीएम नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि वो आगे आएं और कश्मीर मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव व कश्मीरी लोगों की भावनाओं के मुताबिक हल करें और पाकिस्तान के साथ मिल कर गरीबी व भूखमरी के खिलाफ, बेरोजगारी के खिलाफ, लोगों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं उसके खिलाफ हाथ मिलाया जाए।
फरवरी, 2021 में लागू सीजफायर के बाद द्विपक्षीय रिश्तों में कोई सुधार नहीं
शहबाज शरीफ के इस प्रलाप से साफ है कि भारत व पाकिस्तान के रिश्ते फरवरी, 2021 से जारी सीजफायर से आगे नहीं बढ़ने वाली है। पाकिस्तान की राजनीतिक गतिविधियों पर भारतीय विदेश मंत्रालय की नजर जरूर है, लेकिन उसने चुप्पी साध रखी है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि पूर्व की नवाज शरीफ सरकार की तुलना नई शहबाज शरीफ सरकार से नहीं की जा सकती। इस बार राजनीतिक माहौल काफी अस्थिर है। भारत अस्थिरता के माहौल में किसी भी पाकिस्तानी सरकार के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं करेगी।
शरीफ सरकार की स्थिरता को लेकर भारत को संदेह
इमरान खान की सरकार के साथ भी भारत सरकार ने जानबूझ कर कोई सकारात्मक संदेश नहीं दिया क्योंकि विदेश मंत्रालय का यह आकलन था कि उनकी सरकार के स्थायित्व को लेकर हमेशा से संदेह था। यही वजह है कि फरवरी, 2021 में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सीजफायर की सहमति बनने के बाद द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार का कोई माहौल नहीं बना।
पाकिस्तान में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल का कहना है कि शहबाज शरीफ के साथ वार्ता शुरू करने का कोई फायदा नहीं है। पाकिस्तान अभी आर्थिक तौर पर और राजनीतिक तौर पर खराब हालात में है। ऐसे माहौल में वहां कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है। शहबाज को पहले स्थिर हो जाने दिया जाना चाहिए। इसी तरह से पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन का कहना है कि भारत को लेकर वहीं पुरानी बात दोहरायी गई है। उम्मीद की जानी चाहिए कि हम अनावश्यक तौर पर कोई तेजी नहीं दिखाएंगे और शहबाज शरीफ से वार्ता शुरू नहीं करेंगे।
