वरिष्ठ नागरिक अपने अनुभव से युवा पीढ़ी का करें मार्गदर्शन: अरोड़ा
- सहारनपुर में साइक्लॉजिस्ट शिल्की अरोड़ा को सम्मानित करते वरिष्ठ नागरिक।
सहारनपुर [24CN]। साइक्लॉजिस्ट एवं माइंड सैट कोच श्रीमती शिल्की अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया में लगभग दस लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष आत्महत्या कर रहे हैं। आत्महत्या करने वाला व्यक्ति आत्महत्या करने से पहले गहन मानसिक दबाव से गुजरता है तथा सही समय पर काउंसिलिंग एवं उचित मार्गदर्शन न मिलने के अभाव में आत्महत्या जैसा कदम उठाता है।
शिल्की अरोड़ा आज यहां ज्वालानगर स्थित एक सभागार में सीनियर सिटीजन वैलफेयर सोसायटी एवं इनर व्हील क्लब डेफोडिल्स देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में वल्र्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे पर आयोजित आत्महत्या की रोकथाम में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका विषय पर कार्यशाला को सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने आत्महत्या की रोकथाम में वरिष्ठ नागरिकों की विशेष भूमिका बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक अपने आसपास ऐसे युवाओं एवं व्यक्तियों की सहायता अपने अनुभव से कर सकते हैं। जिन्हें काउंसिलिंग की आवश्यकता है तथा जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं है, उन्हें आत्महत्या करने वाले व्यक्ति द्वारा आत्महत्या से पूर्व दिए जाने वाले संकेतों व उस दौरान होने वाली मानसिक पीड़ा के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव से गुजर रहे व्यक्ति की स्थिति को जाने बगैर उस पर किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी करना या उसकी बातों को अनदेखा करना व्यक्ति को आत्महत्या की ओर कदम बढ़ाने को प्रेरित करता है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते तनाव एवं अव्यवस्थित जीवनशैली में मनोविज्ञान की भूमिका पर भी चर्चा की।
संस्था के संरक्षक पी. के. शर्मा ने कहा कि आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में वर्तमान पीढ़ी बुजुर्गों से दूर होती जा रही है। अत्यधिक व्यस्तता के कारण हमें अपने बच्चों के साथ समय व्यतीत करने का अवसर नहीं मिल पाता है। परिवारों का विघटन हो रहा है तथा एकाकी परिवारों में बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में परिवार के वरिष्ठ जनों का मार्गदर्शन न मिलने के कारण बच्चे छोटी-छोटी समस्याओं में अपने आपको घिरा महसूस करते हैं। हमें युवाओं व बुजुर्गों के बीच की इस खाई को दूर करना होगा तथा उन्हें अपने अनुभव का लाभ देना होगा।
यशपाल मलिक ने कहा कि जब किसी परिवार में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है तो केवल वही व्यक्ति नहीं मरता बल्कि उसके पूरे परिवार पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे में यदि हम वरिष्ठ नागरिक किसी की सहायता कर उसका जीवन बचा सकें तो यह बड़ा उपकार होगा। कार्यशाला की अध्यक्षता स. सम्पूर्ण सिंह व संचालन विजय अरोड़ा ने किया। कार्यशाला में रंजन गुप्ता, आर. के. जैन, प्रेमनाथ छोकरा, सुरेंद्र शर्मा, सुरेंद्र पाल सिंह, यतेंद्र गुप्ता,
