विद्वान पंडितों ने विधि-विधान से मंत्रोच्चरण के साथ कराई प्रतिमाएं स्थापित

विद्वान पंडितों ने विधि-विधान से मंत्रोच्चरण के साथ कराई प्रतिमाएं स्थापित
  • थानाभवन में पूजा-अर्चना करते एवं शोभायात्रा निकालते श्रद्धालुगण।

थानाभवन।  बुधवार को प्राचीन भगवान श्री जगन्नाथ श्री बाला जी धाम में नमेदेश्वर शिव पिण्डी, नंदी भगवान की प्रतिमा की विधि-विधान से आचार्य पं. राहुल शास्त्री, पं. रामानुज शास्त्री, पं. सुमित शास्त्री ने पूजा अर्चना कराई। तत्पश्चात डीजे, नताशा, ढोल नगाडो के साथ शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा मे युवाओं महिलाओं ने ऊ नम: शिवाय का जाप करते हुये हर-हर, बम-बम का उद्घोष किया। शोभायात्रा का स्थान स्थान पर पुष्प वर्षा से स्वागत किया शोभा यात्रा मौहल्ला कान्गोयान, खैल, टंकी चैथ मेन बाजार से होती हुई मंदिर प्रागण मे समाप्त हुई।

नगर परिक्रमा के पश्चात आयोजित सत्संग मे शाकुम्भर सिद्ध पीठ से आये पं. राहुल शास्त्री ने कहा कि विधी केवल किसी व्यक्ति .विशेष को प्रसन्न करने के लिए हमारे कर्म नहीं होने चाहिए। जब अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए हमारे द्वारा कार्य संपन्न किया जाता है तो वहीं कार्य परमात्मा को प्रसन्न करने वाला भी बन जाता है। निष्ठापूर्वक, समर्पण भाव, विवेकपूर्ण एवं निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर किया गया प्रत्येक कर्म ही पूजा है। संसार तुम्हारे विरुद्ध खड़ा हो जाओ चिंता मत करना। बस जीवन में शालीन व सहज बने रहना। जैसे ही भगवान शिव के पूजन के लिए जाओगे शिव रीझ जाएँगे और सारे संकटों को हर लेंगे। बहुधा लोगों को लगता है कि हम बहुत भोले हैं, इसलिए लोग ठग लेते हैं। बिलकुल भी परेशान ना होना, भोलापन को बने रहने देना। भोले लोगे के नाथ ही ये भोलेनाथ हैं। भगवान भोलानाथ तुम्हारे साथ खड़े हैं।

भगवान शिव गले में सर्पों की माला पहनते हैं मगर अपनी शांति का त्याग नहीं करते। सर्पों की माला धारण करना अर्थात अनेक मुश्किलों को अपने ऊपर ले लेना। जीवन है तो मुश्किलें तो आएँगी। फर्क सिर्फ इतना है कि जो उन्हें हँसके सह लेता है, वह शिव बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता वह शव बन जाता है। भगवान शिव का एक नाम ‘आशुतोष भी है। आशुतोष अर्थात बहुत जल्दी और बहुत कम में प्रसन्न हो जाने वाले।

वही साहसी है और बड़ा है जो दूसरों से लेने की नहीं देने की इच्छा और सामर्थ्य रखता है। केवल आयु में ही नहीं आचरण में भी बड़े होने का प्रमाण दो। दूसरों से अपेक्षा नहीं अपितु उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने वाले बनो। यही शिवत्व है। सत्संग के पश्चात आरती शयनधिवास किया गया वृहस्पतिवार को स्थापना की जायेगी शोभा यात्रा मे मोहित तायल अंकुर तायल शोभित तायल गौरी शंकर रुचिन तायल  नीरज जैन अंकित कुमार, अमित गोयल मिथिल तायल सतीश गुप्ता विनय तायल नवीन गर्ग वत्सल तायल सुनिल तायल आदि सहित बडी संख्या मे महिलाए उपस्थित रही