सिलेंडर की सप्लाई से शुरू हुआ था रिंकू सिंह का सपना, मुकाम तक पहुँचाकर खामोश हो गए पिता खानचंद

सिलेंडर की सप्लाई से शुरू हुआ था रिंकू सिंह का सपना, मुकाम तक पहुँचाकर खामोश हो गए पिता खानचंद

रिंकू जब मैदान पर लंबे छक्के मारकर करोड़ों भारतीयों का दिल जीतते थे, तब अलीगढ़ की गलियों में सिलेंडर पहुँचाने वाले खानचंद सिंह की आँखों में गर्व के आँसू होते थे।

क्रिकेटर के पिता कैंसर से पीड़ित थे और काफी समय से ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज हो रहा था। अस्पताल के चिकित्सकों ने यह जानकारी दी। ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल के प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह लिवर के कैंसर से जूझ रहे थे।

हाल में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद 21 फरवरी से वह अस्पताल में ही भर्ती थे। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली वेंटिलेटर पर रखा गया था और आज तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। पिता की गंभीर हालत होने के कारण रिंकू सिंह को टी20 विश्वकप को बीच में छोड़कर देश लौटना पड़ा था। हालांकि 26 फरवरी को जिम्‍बाब्वे से होने वाले मैच से पहले वह वापस भारतीय टीम के साथ जुड़ गए थे। हाल में वह अपने पिता से मिलने के लिए नोएडा भी पहुंचे थे।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले 28 वर्षीय रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का बहुत बड़ा हाथ रहा है। अलीगढ़ में गैस सिलेंडर आपूर्ति का काम करने वाले खानचंद सिंह ने तमाम अभावों के बावजूद रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में हरसंभव मदद की। परिवार ने बताया कि खानचंद सिंह का अंतिम संस्कार अलीगढ़ में होगा और रिंकू सिंह भी अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।


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