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अदालत के पुलिस मुठभेड पर सवालिया निशान, प्रत्येक प्रकरण समरुप क्यों

  • 16 दिसंबर को हुई मुठभेड की चल रही थी सुनवाई, अभियुक्त ने दिखाए बेगुनाही के सुबूत
  • अदालत ने एसएसपी को दिए निष्पक्ष जांच कराने के आदेश

देवबंद। एसीजेएम परविंद्र सिंह ने एक मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस मुठभेडों पर सवालिया निशान उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में अभियुक्त के फायरिंग करने और जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त को गोली लगने के कथन किए जाते हैं। प्रत्येक प्रकरण में समरुप घटना घटित होना अवलोकनीय तथ्य है। उन्होंने एसएसपी को 16 दिसंबर को हुई पुलिस मुठभेड की निष्पक्ष जांच कराने के आदेश दिए हैं।

एसीजेएम परविंद्र सिंह की अदालत 16 दिसंबर को हुई पुलिस मुठभेड़ के मामले में सुनवाई कर रही थी। अदालत ने मुठभेड़ में गोली लगने से 25 हजार के इनामी चरथावल निवासी दानिश के घायल होने व दो अन्य के गिरफ्तार होने के मामले में पुलिस की कहानी में झोल होने का शक जताया है। मामले की विवेचना कर रहे उपनिरीक्षक अजब सिंह ने एसीजेएम परविंदर सिंह की अदालत में बताया कि 16 दिसंबर की देर शाम पुलिस थीतकी की पुलिया के पास चैकिंग कर रही थी। तभी एक गोल्डन रंग की होंडा कार आती दिखाई दी पुलिस ने कार रुकने का इशारा किया तो कार सवार बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। बदमाशों का पीछा करते हुए पुलिस ने कार को गंगदासपुर के बंद पड़े ईंट भट्टे के पास घेर लिया और जवाबी फायरिंग में गोली बदमाश दानिश को लगी जबकि उसके दो साथी जफरियान व इसरार को गिरफ्तार कर लिया गया। दानिश 25 हजार का इनामी है और उस पर चरथावल थाने में पहले से ही कई मामले दर्ज है। वहीं, पुलिस की मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए अभियुक्त दानिश ने अदालत में बताया कि 16 दिसंबर की दोपहर वह गांव तिगरी के प्रधान पति मोती के यहां प्लाट के पैसे देकर आ रहा था। दोपहर दो बजे गोपाली में स्थित पेट्रोल पंप पर गाड़ी में डीजल डलवाने के लिए रुका वहां से निकलते ही पुलिस ने पकड़ लिया व अपने साथ ले गई। अभियुक्त ने पैसे देते समय व डीजल डलवाते समय के सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में पेश किए। जिसे देखते हुए अदालत ने पुलिस की तीनों अभियुक्तों की 14 दिन की रिमांड को खारिज कर दिया, साथ ही एसएसपी को मामले की निष्पक्ष विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।

मुठभेड को लेकर अदालत ने यह की सख्त टिप्पणी

एसीजेएम परविंदर सिंह की अदालत ने प्रकरण में पुलिस की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए कहा कि पुलिस द्वारा प्रत्येक प्रकरण में अभियुक्त के फायरिंग करने व जवाबी कार्रवाई में फायरिंग करने पर अभियुक्त को गोली लगने के कथन किए जाते है। अदालत ने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में समरुप घटना घटित होना अवलोकनीय तथ्य है। यह तथ्य पूर्व नियोजित मामला दर्ज करने की कार्यप्रणाली को प्रकट करता है व गंभीर प्रकृति का है। इसलिए अभियुक्त की दाखिल आपत्ति के तर्कों के संबंध में पूर्ण विवेचना की आवश्यकता है।

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