प्रमोद मिगलानी पुन: एमएसएमई फैसिलिटेशन काउंसिल के सदस्य नामित
सहारनपुर। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहारनपुर चौप्टर चेयरमैन प्रमोद सडाना ने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उद्यमियों की देरी से होने वाली पेमेंट के लिए 2 वर्ष पूर्व समस्त प्रदेशों में 5 सदस्यों की एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल, ज्यूडिशरी कमेटी का गठन किया गया था। इस एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल ज्यूडिशरी कमेटी में दो वर्ष के लिए पुन: एक बार इण्डियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद मिगलानी को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
आईआईए के समस्त सदस्यों के लिए बहुत ही खुशी की बात है। आईआईए पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल कमेठी सदस्य प्रमोद मिगलानी ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों द्वारा माल की सप्लाई किए जाने के बाद पेमेंट मिलने में देरी के कारण अधिकतर सूक्ष्म एवं लघु उद्योग बंदी के कगार (एनपीए) पर आ जाते थे, उनकी पेमेंट की सुरक्षा को लेकर एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार द्वारा समस्त प्रदेशों में 5 सदस्यों के साथ एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल ज्यूडिशरी कमेटी का गठन किया गया था। इस काउंसिल द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की 45 दिन के बाद मिलने वाली पेमेंट पर आरबीआई द्वारा निर्धारित बैंक ब्याज दर का तीन गुना ब्याज एवं मूल धनराशि दिलाये जाने का प्रावधान किया गया हैं।
उन्होंने बताया कि एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल छोटे-छोटे उद्योगों के लिए संजीवनी बूटी का काम करता है एवं उनमें प्राण का संचार करता है। पूरे भारत वर्ष में सभी प्रदेशों में एक-एक काउंसिल का गठन किया गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश मात्र एक ऐसा प्रदेश है जहां पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की पेमेंट से संबंधित अधिक संख्या में केस आने के कारण केसों का निस्तारण करने में बहुत समय लग रहा था जिसके कारण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2 वर्ष पूर्व समस्त मंडल स्तर पर 5 सदस्य एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल का गठन किया गया था। इस काउंसिल के अध्यक्ष मंडलायुक्त, सचिव संयुक्त आयुक्त उद्योग, सदस्य लीड बैंक मैनेजर (पीएनबी) एवं दो सदस्य औद्योगिक संस्थाओं के प्रतिनिधि होते है।
उसी के अनुपालन में यहां पर प्रत्येक माह एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल की बैठक की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक इस एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल में दो वर्ष में कुल 162 वाद रजिस्टर्ड किए गए हैं जिनमें 77 वादों का निस्तारण किया जा चुका है और 52 केस कंसीलियेशन एवं 33 आब्रीट्रेशन में विचाराधीन हैं। इस एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल में सभी वादों का निस्तारण 90 दिन में किए जाने का प्रावधान है।
उत्तर प्रदेश एक मात्र प्रदेश है जहां इस काउंसिल द्वारा दिये गये अवार्ड का निष्पादन राजस्व अधिनियम के तहत रिकवरी सर्टिफिकेट द्वारा वसूली किए जाने का प्रावधान है। उस अवार्ड की अपील खरीदार द्वारा अवार्ड राशि का 75 प्रतिशत राशि जमा किए जाने के बाद ही की जा सकती है। संस्था के किसी भी उधमी की विलंब पेमेंट से संबंधित समस्या है तो वह आईआईए कार्यालय के माध्यम से अपना केस रजिस्टर्ड करवा सकते हैं।
