देशभर में प्लास्टिक बोतल पर नहीं लगाया जा सकता प्रतिबंध: केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री

 

खास बातें

  • बिना विकल्प बंद नहीं होगी प्लास्टिक बोतल
  • 85 फीसदी बोतल पारदर्शी होना चाहिए पानी की पैकिंग के लिए

प्लास्टिक बोतल में सीलबंद पानी का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और कंपनियों को सरकार ने सख्त कदम नहीं उठाने का भरोसा दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री ने सोमवार को कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक का सस्ता और भरोसेमंद विकल्प खोजे बगैर इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। लोग खुद जागरूक होते हुए इसका कम से कम उपयोग करें और शीशे या धातु की बोतल उपयोग में लाएं।

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बोतलबंद पानी बेचने वाली शीर्ष कंपनियों के प्रतिनिधियों और एफएसएसआई, बीआईएस, सीएसआईआर और रेलवे जैसे महकमों के प्रतिनिधियों की सोमवार को केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में बैठक थी। इसमें पासवान ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग यथासंभव बंद करने का आह्वान किया है।

इसे देखते हुए उन्होंने अपने मंत्रालय में तो प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन देशभर में इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। पहले इससे संबंधित सभी हितधारकों से बातचीत की जाएगी, जिसका एक चरण सोमवार को पूरा हो गया है।

अब इन्हें तीन दिन का समय दिया गया है, ताकि वे अपनी बात मंत्रालय को लिखित में बता सकें। इसके बाद जरूरत हुई तो एक और बैठक बुलाई जाएगी और फिर कुछ फैसला होगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक को पूरी तरह से हटाने का निर्णय सभी से विमर्श के बाद लिया जाएगा और ग्राहकों के हितों तथा पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।

चुनौती है कागज की बोतल

बैठक में सुझाव आया कि कागज की बोतल बनाकर उसमें पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, लेकिन कागज की बोतल में पानी पैक करने के लिए उस पर प्लास्टिक या धातु की परत चढ़ानी पड़ती है। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो के नियम में भी बदलाव करना होगा। यह नियम कहता है कि बोतल का 85 फीसदी हिस्सा पारदर्शी होना चाहिए। कागज का बोतल बनाने में यह पारदर्शी नहीं हो सकेगा। साथ ही यह प्लास्टिक बोतल के मुकाबले महंगा भी पड़ेेगा।
 
 

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