पीर बाबा की फ्रेंचाइजी! सरकारी जमीन पर कई मजारों का खुलासा, जांच में सामने आया अतिक्रमण, सीएम ने दिया बड़ा बयान
उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध मजारों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. राज्य सरकार की जांच में खुलासा हुआ है कि एक ही पीर–फकीर के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर कई मजारें बनाई गईं, जिनका उद्देश्य सरकारी जमीन पर कब्जा करना था. सैय्यद भूरे शाह और कालू सैय्यद के नाम से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बनी मजारों ने जांच एजेंसियों को भी हैरानी में डाल दिया है.
जांच में यह तथ्य सामने आया कि सामान्यतः किसी भी पीर या फकीर की एक ही मजार होती है, लेकिन उत्तराखंड में एक ही नाम से कई-कई मजारें पाई गईं. राज्य सरकार द्वारा कराई गई गोपनीय जांच में इसे सुनियोजित तरीके से किया गया अतिक्रमण बताया गया है. इस प्रक्रिया में सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराकर उस पर अवैध बसावट को बढ़ावा दिया गया.
तथ्यों के अनुसार, उत्तर प्रदेश से जुड़े पुराने दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड में दर्ज वक्फ संपत्तियों की संख्या बीते 25 वर्षों में ढाई गुना तक बढ़ गई है. जांच में यह भी सामने आया है कि वक्फ बोर्ड में वर्तमान में 725 मस्जिदें और 769 कब्रिस्तान दर्ज हैं, जबकि लगभग इतनी ही मस्जिदें अभी तक वक्फ बोर्ड में पंजीकृत नहीं हैं.
राज्य में 203 मजारें और दरगाहें वक्फ बोर्ड में दर्ज
मजारों को लेकर स्थिति और भी गंभीर पाई गई. राज्य में 203 मजारें और दरगाहें वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी भूमि पर कब्जा कर दर्ज कराई गईं. इसके अलावा अब तक 572 अवैध मजारों को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किया जा चुका है. खास बात यह रही कि हटाई गई किसी भी मजार की मिट्टी में मानव अवशेष या अन्य धार्मिक दफन से जुड़े प्रमाण नहीं मिले. इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि इन मजारों का निर्माण केवल भूमि कब्जाने के उद्देश्य से किया गया था.
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि अभी प्रदेश में सरकारी या निजी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई करीब 300 से अधिक मजारें मौजूद हैं. अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अब तक 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को खाली कराया जा चुका है. सरकार अब यह भी जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों में और किस आधार पर इन जमीनों को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया.
इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “एक नाम से कई मजारें कैसे हो सकती हैं, यह बड़ा सवाल है. कोई भी पीर या फकीर एक ही स्थान पर दफन होता है. देवभूमि उत्तराखंड में इस तरह का खेल नहीं चलेगा. हमारी सरकार पूरी तरह कानूनी और विधि सम्मत तरीके से जांच कर रही है कि सरकारी भूमि पर किसने, कैसे और क्यों अवैध कब्जे किए. यह भी देखा जा रहा है कि ये जमीनें किस आधार पर वक्फ की संपत्ति बनीं.”
