आतंकियों को पैसा-प्रशिक्षण-हथियार दे रहा पाकिस्तान, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
- पाकिस्तान की ओर से आए भड़काऊ बयानों और जम्मू-कश्मीर पर आतंकी हमलों की आशंका के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को रविवार को आड़े हाथों लिया.
नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबानराज की वापसी के बाद पाकिस्तान की ओर से आए भड़काऊ बयानों और जम्मू-कश्मीर पर आतंकी हमलों की आशंका के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को रविवार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने बगैर किसी लाग-लपेट के कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रखा है. इसके लिए वह न सिर्फ आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति कर प्रशिक्षण दे रहा है, बल्कि उन्हें धन भी मुहैया करा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा के साथ कतई कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने चीन से समीवा विवाद के दौरान भारतीय सेना के अदम्य साहस और धैर्य की भी प्रशंसा की.
दुश्मनों को जवाब देने में सक्षम है भारत
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पोषित आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अपनी जमीं पर पनपते आतंक को खत्म करने का तरीका औऱ सलीका दोनों आता है. अगर जरूरत पड़ी तो उनकी (पाकिस्तान) जमीन पर पनप रहे आतंक के तंत्र को ध्वस्त करने में भी कोई हिचक नहीं होगी. भारत की काउंटर टेरेरिज्म ऑपरेशन की क्षमता हर गुजरते दिन के साथ औऱ मजबूत हो रही है. भारत अपने दुश्मनों को मुहं तोड़ जवाब देने में सक्षम है. इसके लिए एकीकृत कमांड का भी जल्द ही गठन कर दिया जाएगा.
भारतीय सुरक्षा बल किसी भी दुश्मन का सामना करने को तैयार
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से यदि संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाओं में कमी आई है, तो उसकी प्रमुख वजह सशक्त भारत है. 2106 में सीमा पार हमारे प्रतिरोध ने न सिर्फ हमारी बदली मानसिकता को प्रदर्शित किया है, बल्कि दुश्मन देशों को भी संदेश गया है कि यह एक नया भारत है, जो किसी तरह की राष्ट्रविरोधी कार्रवाई पर चुप नहीं बैठेगा. इस धारणा को और मजबूत करने का काम किया है 2019 की बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक ने. इस सर्जिकल स्ट्राइक ने सिद्ध कर दिया है कि हमारे सुरक्षा बल किसी भी स्थिति में और कहीं पर भी दुश्मन का सामना करने के लिए तैयार हैं.
अफगानिस्तान नीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पर भारत की रणनीति क्या होगी. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में बदलते समीकरण भारत के लिए चुनौती हैं. यही वजह है कि 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत सरकार अपनी अफगान नीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर है. हम अपनी रणनीति बदल रहे हैं और ‘क्वॉड’ का गठन इस रणनीति को रेखांकित करता है.
