अब कश्मीर पर पाकिस्तान ने चली एक और चाल, टीवी चैनलों पर नहीं होगा विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण

 
खास बातें

  • भारत में जब से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाया गया है, पाकिस्तान तभी से बौखलाया हुआ है।
  • पाकिस्तान ने कश्मीर और कश्मीरी लोगों के नाम का इस्तेमाल किया है।
  • सने पाकिस्तानी चैनलों पर प्रसारित होने वाले ईद के विशेष कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है।
  • पाकिस्तानी टीनी चैनलों को अपने लोगो ब्लैक एंड व्हाइट रखने की सलाह भी दी गई है।

भारत में जब से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाया गया है, पाकिस्तान तभी से बौखलाया हुआ है। समझौता एक्सप्रेस, भारतीय फिल्मों और व्यापार संबंधों पर रोक के बाद अब पाकिस्तान ने एक और नई चाल चली है। इस बार पाकिस्तान ने कश्मीर और कश्मीरी लोगों के नाम का इस्तेमाल किया है। उसने पाकिस्तानी चैनलों पर प्रसारित होने वाले ईद के विशेष कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है।

पाकिस्तान मीडिया नियामक प्राधिकरण ने मीडिया आउटलेट्स से कहा है कि बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण ना करें। ऐसा इसलिए क्योंकि ना केवल पाकिस्तान बल्कि इससे कश्मीरी लोगों की भावनाएं भी आहत हो सकती हैं।

पाकिस्तान मीडिया नियामक प्राधिकरण ने शनिवार को एक अधिसूचना में कहा है, “कश्मीर के साथ एकजुटता को देखते हुए बकरीद को धार्मिकता के रूप में सादगी से मनाया जाएगा। इसलिए यह अनुरोध किया जाता है कि कोई विशेष कार्यक्रम (पहले से रिकॉर्ड या नियोजित लाइव) न हो। बकरीद के जश्न के रूप में प्रसारित होने के कारण न केवल पाकिस्तान बल्कि कश्मीर के लोगों की भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है।”

इसमें पाकिस्तानी टीनी चैनलों को अपने लोगो ब्लैक एंड व्हाइट रखने की सलाह भी दी गई है।

कश्मीरियों के साथ मनाएंगे स्वतंत्रता दिवस

पाकिस्तान की नौटंकी यहीं खत्म नहीं होती है। पाकिस्तान टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस कश्मीरियों के साथ मिलकर मनाएंगे। पाकिस्तानी मीडिया नियामक प्राधिकरण ने कहा है कि भारत के स्वतंत्रता दिवस, यानी 15 अगस्त को काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। और इस दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाएगा।

भारतीयों का बहिष्कार

इससे पहले पाकिस्तान के मीडिया नियामक ने आठ अगस्त को समाचार चैनलों से अपने किसी भी डिबेट शो में किसी भी तरह की टिप्पणी और विश्लेषण के लिए भारतीय सेलिब्रिटी, राजनेता, पत्रकार और विश्लेषकों को आमंत्रित नहीं करने का निर्देश दिया था।
 
 

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