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श्रीलंका में अब प्रदर्शनकारियों को काबू करना बड़ी चुनौती; सैन्य कार्रवाई कितनी कारगर, विशेषज्ञों ने दिया यह जवाब

श्रीलंका में अब प्रदर्शनकारियों को काबू करना बड़ी चुनौती; सैन्य कार्रवाई कितनी कारगर, विशेषज्ञों ने दिया यह जवाब
  • श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण पाना सेना और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सवाल यह कि क्‍या प्रदर्शनकारियों पर सैन्य कार्रवाई ही विकल्‍प है। जानें इस बारे में विशेषज्ञों की राय…

नई दिल्ली। श्रीलंका में हालात खराब होते जा रहे हैं। विशेषज्ञ इसे श्रीलंका का बेहद नाजुक मोड़ करार दे रहे हैं। रणनीतिक मामलों के जानकारों ने कहा कि श्रीलंका में स्थिति बहुत नाजुक है। अगर ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों पर कोई भी सैन्य कार्रवाई की जाती है तो माहौल खराब हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि श्रीलंका में राजनीतिक अराजकता से बचने और स्थिरता बहाल करने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करने की जरूरत है।

मौजूदा समय बेहद अनिश्चित

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2009 से 2013 तक श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त रहे अशोक के. कंठ ने कहा, ‘इस समय स्थिति बहुत अनिश्चित है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक अराजकता से बचा जाए, लेकिन साथ ही सेना और पुलिस के किसी भी हस्तक्षेप से स्थिति और खराब हो सकती है।’

दूसरे किस्म का संकट पैदा होने के आसार

अशोक के. कंठ ने कहा, ‘स्थिति बहुत कठिन है। लेकिन जिस चीज की आवश्यकता है वह वास्तव में श्रीलंका के संविधान की सीमा के भीतर किसी प्रकार की राजनीतिक स्थिरता की बहाली है।’ विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव अनिल वाधवा ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, ‘यह हमारे हित में होगा कि भारत में शरणार्थी नहीं आएं, क्योंकि इससे दूसरे किस्म का संकट पैदा हो सकता है।’

अगले कुछ महीने बेहद संवेदनशील

वाधवा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की ओर से श्रीलंका के लिए तत्काल राहत पैकेज दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी नई सरकार बनेगी, श्रीलंका के लिए उतना ही बेहतर होगा, क्योंकि यह प्रमुख मुद्दों का समाधान कर सकती है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर एसडी मुनि ने कहा कि अगले कुछ महीनों में श्रीलंका के लिए चीजें आसान नहीं होंगी

चीनी निवेश पर पड़ सकता है बड़ा प्रभाव : विशेषज्ञ

चीन ने श्रीलंका के बीजिंग समर्थक राजपक्षे बंधुओं के नाटकीय पतन पर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वहां फैली अराजकता के कारण द्विपक्षीय संबंधों और चीन द्वारा बुनियादी ढांचे में किए गए व्यापक निवेश पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

चीन के साथ संबंधों पर संकट

शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ लिन मिनवांग ने कहा, ‘अल्प अवधि में श्रीलंका के साथ चीन के संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि राजनीतिक हलकों में राजपक्षे परिवार का प्रभाव कम हो जाएगा और निकट भविष्य में उनकी राजनीतिक वापसी की संभावना भी नहीं है।’ चीन में महिंदा राजपक्षे को भारत की सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार कर श्रीलंका में चीनी निवेश को बढ़ावा देने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है।

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