12 लाख तक की इनकम पर नहीं लगेगा कोई टैक्स, जानिए क्या है पूरा गणित

 

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से शुक्रवार को पेश वार्षिक बही-खाता 2019-20 में आयकर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरिम बहीखाता में पांच लाख रुपये तक की आय करमुक्त बनी रही होगी। वहीं सरकार ने अति अमीरों की जेब ढीली करते हुए तीन से सात फीसदी का सेस लगाने का प्रस्ताव किया है।

पांच लाख तक आय पर कर नहीं : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने  कहा कि सालाना पांच लाख रुपये तक कर योग्य आय होने पर कोई कर नहीं देना होगा। वित्तमंत्री ने अंतरिम बजट में आयकर में दी गई छूट को बरकरार रखा है।

पांच करोड़ से अधिक की कमाई पर 37 फीसदी अधिभार : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आम बजट पेश करते हुए दो *करोड़ रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये तक कम की सालाना व्यक्तिगत आय पर 25 प्रतिशत अधिभार लगाने का प्रस्ताव किया है। वहीं पांच करोड़ रुपये से अधिक की आय पर 37 प्रतिशत का अधिभार देना होगा।

अमीरों पर बढ़ा कर : सीतारमण ने अमीरों पर अधिक कर लगाने की घोषणा की है। उन्होंने दो से पांच करोड़ सालाना कमाने वालों पर तीन फीसदी और सात करोड़ रुपये से अधिक आमदनी वालों पर सात फीसदी का सेस लगाने का प्रस्ताव किया है।

मध्यम वर्ग का घर-कार का सपना सस्ता : वित्तमंत्री ने 45 लाख रुपये तक घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वाले मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कर्ज के ब्याज पर मिलने वाली छूट को 1.5 लाख रुपये कर दिया है। अब दो के बजाय साढ़े तीन लाख रुपये सालाना ब्याज राशि पर कर छूट मिलेगी, बशर्ते यह कर्ज 20 मार्च 2020 से पहले लिया गया हो। इससे 15 साल में सात लाख रुपये का फायदा होगा। वित्तमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए कर्ज लेने पर 1.5 लाख रुपये सालाना ब्याज को भी मुक्त किया है।

कॉरपोरेट-स्टार्टअप को राहत : सीतारमण ने कहा कि अब 400 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों को 25% न्यूनतम निगम कर का लाभ मिलेगा। इससे पहले यह लाभ 250 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों को मिलती थी। स्टार्टअप कंपनियों की ओर से जमा कोष को भी आयकर विभाग की निगरानी से बाहर कर दिया गया है।

पारदर्शिता के ये उपाय किए
रिटर्न भरना जरूरी : सालाना एक करोड़ रुपये खाते में जमा करवाने,विदेश यात्रा पर दो लाख रुपये खर्च करने और एक लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल सालाना भरने पर आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य होगा।

आधार से भी रिटर्न : अब जिन लोगों के पास पैन नंबर नहीं है वे आधार संख्या के आधार पर आयकर रिर्टन भर सकते हैं। जिन करदाताओं के पास पैन-आधार दोनों है वे भी आधार का विकल्प चुन सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक जांच : इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिटर्न की जांच की व्यवस्था की गई है ताकि अधिकारियों और करदाताओं में सीधा संपर्क कम से कम हो। इसका मकसद गैर जरूरी गतिविधियों पर लगाम लगाना है।

रिटर्न भरना होगा आसान
अब नौकरीपेशा लोगों के लिए आयकर रिटर्न भरना आसान होगा, क्योंकि आयकर दाता की तनख्वाह से हुई कर कटौती, समवधि जमा राशि पर कटे टीडीएस, स्टॉक मार्केट और म्युचूअल फंड आदि में जमा राशि पर कर आदि की जानकारी पहले से फॉर्म में स्वत: भरी होगी।

* 78 फीसदी प्रत्यक्ष कर बढ़ा 2014-18 के बीच
* 11.37 लाख हुआ प्रत्यक्ष कर संग्रह 2018-19 में

सही प्रबंधन किया तो 12 लाख तक आय पर कर नहीं
ऐसे समझे गणित
5,00,000                          कर योग्य आय
1,50,000                            80सी
50,000                          नेशनल पेंशन स्कीम
50,000                          मानक कटौती
10,000                          जमा पर ब्याज में छूट
25,000                          मेडिक्लेम
3,50,000                       आवास पर ऋण छूट
1,50,000                       इलेक्ट्रिक वाहन ऋण छूट
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12,35,000 रुपये

आयकर स्लैब
आय                                      आयकर
250000 रुपये तक                   शून्य
250000 से 500000 रु.             5%
500001 से 1000000 रु.           20%
1000000 रु. से अधिक              30 %

एक से दो करोड़ तक की आय पर 15% अधिभार
करदाताओं को उनकी आमदनी 10,0000 रुपये से अधिक होने पर अधिभार देना होगा। इसका ब्योरा इस प्रकार है।

* किसी व्यक्ति की कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक लेकिन एक करोड़ रुपये से कम होने पर उसे कर पर 10 प्रतिशत का अधिभार भी देना होगा।
* एक करोड़ रुपये से दो करोड़ रुपये तक की आय पर अधिभार की दर 15 प्रतिशत रखी गई है।
* दो करोड़ से अधिक पांच करोड़ रुपये तक की आय पर अधिभार 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
* किसी व्यक्ति की आय पांच करोड़ रुपये से अधिक होने पर उसे 37 प्रतिशत की दर से अधिभार देना होगा।

80 साल से अधिक उम्र के लिए स्लैब 
आय                                       आयकर
5,00,000 रुपये तक                  शून्य
5,00,001 से 10,00,000 रुपये   20 प्रतिशत
10,00,000 रुपये से अधिक       30 प्रतिशत

 

 
 
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