निकाह बना दिखावे का मैदान!” पाकिस्तानी कल्चर पर मौलाना इसहाक गोरा का सख़्त बयान

निकाह बना दिखावे का मैदान!” पाकिस्तानी कल्चर पर मौलाना इसहाक गोरा का सख़्त बयान
मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा

देवबंद: जमीयत दावतुल मुस्लीमीन के संरक्षक और मशहूर देवबंदी आलिम मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने एक बार फिर भारतीय समाज में शादियों के बदलते रुझान पर गहरी चिंता ज़ाहिर की है। उन्होंने खास तौर पर पाकिस्तानी शादी कल्चर की बढ़ती नक़ल को समाज के लिए नुकसानदेह बताते हुए इस पर सख़्त एतराज़ दर्ज किया है।

मौलाना ने कहा कि निकाह, जो इस्लाम में एक सादा, आसान और बरकत वाला अमल माना गया है, आज उसे हमने दिखावे, फिज़ूलखर्ची और गैर-ज़रूरी रस्मों का बोझ बना दिया है। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली पाकिस्तानी शादियों की चमक-दमक से प्रभावित होकर लोग उसी रास्ते पर चल पड़े हैं, जबकि इन रस्मों का इस्लामी तालीमात से कोई ताल्लुक नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा पाकिस्तानी सीरियलों पर कड़ा एतराज़ जता चुके हैं। उन्होंने तलाक़ और खुला जैसी चीज़ों के बढ़ते चलन के पीछे इन सीरियलों के असर को एक बड़ी वजह बताया था और कहा था कि यह ट्रेंड समाज की बुनियाद को कमज़ोर कर रहा है।

बुधवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा,

“आज हम इस्लामी तालीमात से दूर होते जा रहे हैं। शादियों को आसान और सादा बनाने के बजाय हमने उन्हें दिखावे और रियाकारी का ज़रिया बना लिया है। पाकिस्तानी शादी कल्चर की अंधी नक़ल हमारे समाज में गलत रिवायतों को बढ़ावा दे रही है, जो सरासर नाक़ाबिले-क़ुबूल है।”

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी समाज की हर चीज़ क़ाबिल-ए-इत्तेबा नहीं होती। सिर्फ इसलिए कि कोई चीज़ सोशल मीडिया पर खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देती है, वह दीन के एतबार से सही हो यह ज़रूरी नहीं। “हमें होशमंदी से काम लेना होगा और यह तय करना होगा कि हम ट्रेंड के पीछे चलेंगे या शरीअत के उसूलों को अपनाएंगे,” उन्होंने कहा।

मौलाना ने मुसलमानों से अपील की कि वे शादियों को सादगी, हया और दीन के मुताबिक अंजाम दें, ताकि यह रिश्ता रहमत और बरकत का ज़रिया बने, न कि बोझ और दिखावे का मैदान। उनके इस बयान के बाद समाज में शादियों में बढ़ती फिज़ूलखर्ची और बाहरी कल्चर की नक़ल को लेकर एक बार फिर बहस तेज़ हो गई है।


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