अखिलेश यादव का नाम लेकर मायावती का सपा पर तीखा हमला, कहा- अपनी सरकार बनते ही…

अखिलेश यादव का नाम लेकर मायावती का सपा पर तीखा हमला, कहा- अपनी सरकार बनते ही…

New Delhi : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. सपा द्वारा कांशीराम जयंती मनाए जाने के दावों के बीच बसपा चीफ की यह प्रतिक्रिया अहम मानी जा रही है. इस बयान के बाद राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ना तय माना जा रहा है.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर मायावती ने लिखा कि जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए (PDA) भी अच्छी तरह से जानता है

पूर्व सीएम ने लिखा कि साथ ही, ’बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक  मान्यवर कांशीराम की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाज़ी के सिवाय कुछ भी नहीं है अर्थात् सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है, जैसाकि अन्य विरोधी पार्टियाँ भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नज़र आती हैं.

बसपा नेता ने लिखा कि वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बी.एस.पी.-विरोधी रवैये के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज़्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है.

वैसे सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत ख़ासकर सन 1993 में सपा व बी.एस.पी. की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद  तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बी.एस.पी. को दिनांक 1 जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है.

अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर कांशीराम के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया ज़िला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था.  और जब बी.एस.पी. की सरकार ने कासगंज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?

उन्होंने लिखा कि इतना ही नहीं बल्कि सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गोंं एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को साथ मिलाकर इन्हें सत्ता की मास्टर चाबी दिलाकर इन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के मिशन के लिये अपना पूरा जीवन इसी संघर्ष में लगा देने वाले मान्यवर कांशीराम की दिली ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दिया था.

बसपा चीफ ने लिखा कि साथ ही, मुस्लिम समाज को दिये गये वादे के मुताबिक मान्यवर कांशीराम के नाम से नया उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आईआईएम के पास बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंगवेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचारित करती है.  सहारनपुर में भी मान्यवर कांशीराम के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया. क्या यही सब है सपा का मान्यवर कांशीराम के प्रति आदर व सम्मान?

मायावती ने लिखा कि इसके अलावा, अपने इस दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है. कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभावित हुये हैं.

उन्होंने लिखा कि हक़ीक़त में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण बीजेपी को राजनीतिक रोटी सेंकने का भरपूर मौक़ा मिलता रहा और इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज तथा साथ ही हर प्रकार से त्रस्त प्रदेश की करोड़ों आमजनता है.  कुल मिलाकर, सपा का दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व बहुजन समाज विरोधी जो जातिवादी व साम्प्रदायिक रवैया शुरू से अभी तक भी रहा है तो यह किसी से छिपा नहीं है.

बसपा चीफ ने कहा कि इसके साथ ही सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तथा बहुजन एकता के लिये उनके योगदान की सराहना करना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहान्त के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित की गयी थी? सपा बहुजन समाज को जवाब दे. अतः सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये, यही बी.एस.पी. की अपील है. धन्यवाद. जय भीम, जय भारत.


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