मौलाना कारी इसहाक गोरा बोले- बुर्का पहनने पर रोक लगाने वाली दुकानों का महिलाएं करें बहिष्कार’
हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को सोचने पर मजबूर कर दिया है. झांसी और झारखंड के कुछ इलाकों में स्थित कुछ ज्वेलरी दुकानों पर ऐसे बैनर लगाए गए हैं, जिनमें बुर्का या नक़ाब पहनने वाली महिलाओं के दुकान में प्रवेश और खरीदारी पर रोक लगाने की बात कही गई है. इन बैनरों के सामने आने के बाद सामाजिक, धार्मिक और मानवाधिकार से जुड़े लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है.
इस पूरे मामले पर जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और जाने-माने देवबंदी आलिम मौलाना क़ारी इसहाक गोरा ने एक वीडियो बयान जारी कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की पाबंदियां न केवल महिलाओं के सम्मान के खिलाफ हैं, बल्कि यह एक तानाशाही सोच को भी दर्शाती हैं. मौलाना ने कहा कि कोई भी दुकानदार यह तय नहीं कर सकता कि कौन किस पहनावे में उसकी दुकान पर आएगा.
महिलाओं को अपमानित किया जा रहा
मौलाना क़ारी इसहाक गोरा ने अपने बयान में कहा कि आज एक तरफ महिला सशक्तिकरण और महिला सम्मान की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर अपमानित किया जा रहा है. यह खुला भेदभाव है और इसे किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्दा, बुर्का, नक़ाब या घूंघट सिर्फ किसी एक धर्म से जुड़ी चीज़ नहीं है. भारत की परंपरा में अलग-अलग धर्म और समुदायों की महिलाएं अपने-अपने तरीके से पर्दे का पालन करती आई हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी कई महिलाएं घूंघट में रहती हैं, जिसे समाज ने हमेशा स्वीकार किया है. ऐसे में सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाना सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है.
दुकानदारों का बहिष्कार करने की अपील
मौलाना ने महिलाओं से अपील की कि वे ऐसी सोच रखने वाले दुकानदारों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करें. उन्होंने कहा कि जो दुकानदार महिलाओं की इज़्ज़त नहीं करता, उससे खरीदारी भी नहीं की जानी चाहिए. जब ऐसे लोगों को आर्थिक नुकसान होगा, तभी वे अपनी सोच बदलने पर मजबूर होंगे.
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
इसके साथ ही मौलाना क़ारी इसहाक गोरा ने शासन और प्रशासन से भी मांग की कि इस तरह के भेदभावपूर्ण और अपमानजनक बैनर लगाने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है और किसी भी नागरिक के साथ धर्म या पहनावे के आधार पर भेदभाव करना कानूनन गलत है.
अंत में उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ पहनावे का नहीं है, बल्कि एक विशेष समुदाय की महिलाओं को जानबूझकर निशाना बनाने का है. अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो समाज में नफरत और विभाजन और बढ़ सकता है. उन्होंने सभी समाज के लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने की अपील की.
