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मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बोले- ‘ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका-इजराइल का हाथ’

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बोले- ‘ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका-इजराइल का हाथ’

ईरान में सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामनेई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप धारण कर लिया है. जिसके बाद वहां के हालात चिंताजनक बने हुए हैं. ईरान के हालात पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी की प्रतिक्रिया आई हैं, उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदारी ठहराया.

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ईरान की सूरत-ए-हाल बहुत बिगड़ चुकी है, और हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, इन हिंसक प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है. वो वहां की सरकार का तख्ता पलटना चाहते हैं. वो चाहते हैं मौलाना खामनेई की सत्ता खत्म हो जाए और वहां अमेरिका का प्रभुत्व हो या गजा शाह पहलवी के पोते को लाकर बिठा दिया जाए. लेकिन, ये मुमकिन नहीं है.

अमेरिका और इज़राइल को बताया ज़िम्मेदार

रजवी ने कहा कि अमेरिका पूरी दादागीरी पर उतरा हुआ है ख़ासतौर पर मुस्लिम दुनिया को अपने कंट्रोल में लेने चाहता है. जिस तरह से गाजा में इज़राइल ने लोगों को मारा, उसी तरह ईरान में भी तख्ता पलटना, वहां लोगों को मारना हमले करना ये तमाम बातें शामिल हैं.

ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर रिजवी ने कहा कि वहां जिस तरह लोगों ने महंगाई और बेरोजगारी के लिए विरोध किया ये करना हर शख्स का अधिकार है लेकिन वहां हिंसक प्रदर्शन करना या अमन शांति के प्रदर्शन में हिंसा होना ख़तरनाक बात हैं. मैं मानता हूं इस प्रदर्शन के पीछे जितने भी हिंसा हुई इस हिंसा में इज़राइल और अमेरिका का हाथ है.

ईरान पर कब्जा करना चाहता है अमेरिका

अमेरिका लगातार वहां लोगों को प्रदर्शन करने के लिए उकसाता रहा. भारत का मुसलमान तो यहीं चाहता है कि पूरी दुनिया में अमन और शांति बनी रहे और हमारी सरकार भी यहीं चाहती है. लेकिन, ईरान को भी सोचना होगा कि मौलाना आयतुल्ला खुमैनी के जरिए जो इस्लामी इंकलाब 50 साल पहले ईरान में आया उस हुकूमत को लोकतंत्र लाना चाहिए था. तानाशाही नहीं लानी चाहिए.

वहां लोकतंत्र नहीं होने की वजह से लोगों के अंदर गुस्सा बढ़ा है और यहीं वजह है कि आज लोग सड़क पर उतर गए हैं. हम तो दुनिया में शांति की अपील करते हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति को अक्ल आए. उन्होंने कहा कि अमेरिका काफी सालों से ईरान की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने में लगा हुआ है. अमेरिका ईरान पर कब्जा करना चाहता है.

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