shobhit University Gangoh
 

mali crisis : पश्चिम अफ्रीकी देश माली में विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को किया ‘गिरफ्तार’

mali crisis : पश्चिम अफ्रीकी देश माली में विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को किया ‘गिरफ्तार’

  • विद्रोही सैनिकों को मिल रहा आम लोगों का साथ, राजधानी में खुशी मना रहे लोग
  • माली का सरकारी टीवी चैनल घटना के बाद से ही बंद हो गया है
  • रूस और अमेरिका ने कहा, माली के हालात पर रखे हैं पैनी नजर
  • इससे पहले 2012 में सफलतापूर्वक किया गया था सैन्य तख्तापलट

बमाको
पश्चिम अफ्रीकी देश माली में इस समय भारी उथल-पुथल की स्थिति है। विद्रोही सैनिकों ने देश के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता और प्रधानमंत्री बाउबो सिसे को बंधक बना लिया है। इसे तख्तापलट की कोशिश माना जा रहा है। राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता के पद से हटने की मांग को लेकर देश में कई महीने से प्रदर्शन हो रहे थे और अब विद्रोही सैनिकों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। देश में इससे पहले 2012 में तख्तापलट हुआ था और उससे इस तख्तापलट की कोशिश में कई समानताएं बताई जा रही हैं।

विद्रोही सैनिकों ने मंगलवार को राष्ट्रपति के आवास को घेर लिया और तख्तापलट की संभावित कोशिश के तहत हवा में गोलीबारी करते हुए उन्हें और प्रधानमंत्री को बंधक बना लिया। बमाको की सड़कों पर सैनिक खुलेआम हथियार लेकर घूमते भी दिखे। तस्वीरों से और स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में उनका नियंत्रण हो गया है। माली का सरकारी टीवी चैनल (ortm mali) भी बंद हो गया है।

एक क्षेत्रीय अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मंगलवार शाम बंधक बना लिया गया। माली में राजनीतिक संकट अचानक से बढ़ गया है, जहां संयुक्त राष्ट्र और पूर्व उपनिवेश फ्रांस ने देश में स्थिरता का माहौल बनाने के लिए 7 साल कोशिश की है।

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों के कार्यों की सराहना की है। कुछ ने एक इमारत में आग लगा दी, जो माली के न्याय मंत्री से संबंधित है। प्रधानमंत्री सिसे ने सैनिकों से हथियार डालने का आग्रह किया है और उनसे सबसे पहले देश के हित में सोचने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान बातचीत के जरिए नहीं किया जा सकता है।’

इससे पहले दिन में सशस्त्र लोगों ने देश के वित्त मंत्री अब्दुलाय दफे समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था और इसके बाद सरकारी कर्मी अपने कार्यालयों से भाग गए। माली के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।’

माली के राष्ट्रपति को लोकतांत्रिक रूप से चुना गया था और उन्हें पूर्व उपनिवेशवादी फ्रांस और अन्य पश्चिमी देशों से व्यापक समर्थन प्राप्त है। इस बीच, अमेरिका ने कहा है कि वह माली में बिगड़ती स्थिति को लेकर चिंतित है। अमेरिकी विदेश विभाग के विशेष दूत जे. पीटर फाम ने ट्वीट किया, ‘अमेरिका सरकार सभी असंवैधानिक परिवर्तनों के विरोध में है चाहे वह सड़कों पर हो या सुरक्षा बलों द्वारा।’

क्यों गुस्से में हैं लोग
मई से ही राष्ट्रपति को जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उस समय देश की सर्वोच्च अदालत ने विवादित संसदीय चुनावों के नतीजों को पलट दिया था। इससे पहले 2012 में भी देश की सेना ने सफलतापूर्वक तख्तापलट कर दिया था। अमेरिका के साथ ही रूस, फ्रांस समेत कई देश माली के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

Jamia Tibbia