सूर्य की आराधना का पर्व है मकर संक्रांति: सूर्यकांत

सूर्य की आराधना का पर्व है मकर संक्रांति: सूर्यकांत
  • सहारनपुर में मकर संक्रांति पूर्व मनाते हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता।

सहारनपुर। हिंदू जागरण मंच के तत्वावधान में मकर संक्रांति का पर्व बड़ी उमंग के साथ मनाय गया। इस दौरान सहभोज का भी आयोजन किया गया।

किशनपुरा स्थित सत्संग भवन में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए हिंदू जागरण मंच के प्रांत सह संयोजक ठा. सूर्यकांत सिंह ने मकर संक्रांति का महत्व बताते हुए कहा कि मकर संक्रांति से पूर्व सूर्यदेव दक्षिणी गोलाद्र्ध में होते हैं। इसलिए भारत में दिन छोटे व रात बड़ी होती हैं लेकिन मकर संक्रांति से सूर्यदेव उत्तरी गोलाद्र्ध की तरफ अपनी यात्रा शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि संक्रांति को देवता माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार संक्रांति देव ने संकरासुर नामक राक्षस का वध किया था। मकर संक्रांति के अगले दिन को कारी दिन या किक्रांत कहा जाता है। इस दिन देवी ने राक्षस किंकारासुर का वध किया था। पंचांग में भी मकर संक्रांति की जानकारी मिलती है।

पंचांग हिंदू पंचांग है जो संक्रांति की आयु, रूप, वस्त्र, दिशा और गति के बारे में जानकारी प्रदान करता है। संक्रांति गतिविधियों जैसे स्नान करना, भगवान सूर्य नैवेद्य अर्पित करना, दान या दक्षिण करना, श्राद्ध या अनुष्ठान करना और उपवास या पारण तोडऩा पुण्यकाल के दौरान किया जाना चाहिए। यदि मकर संक्रांति होती है, सूर्यास्त के बाद सभी पुण्यकाल क्रियाएं अगले सूर्योदय तक स्थगित कर दी जाती है। इसलिए सभी पुण्यकाल क्रियाएं दिन के समय में की जानी चाहिए। इस दौरान अनिल अरोड़ा, राजकुमार शर्मा, प्रदीप ठाकुर, आचार्य सुंदर दास, महंत मांगेदास, मांगेराम त्यागी, अश्विनी शर्मा, वंश शर्मा, हर्ष डाबर, प्रवेश धवन, ललित दीक्षित, कृष्ण कुमार आदि शामिल रहे।