सिराथू से केशव मौर्या 7000 वोटों से पीछे, काउंटिंग स्थल पर बवाल
- भले ही उत्तर प्रदेश में बीजेपी को प्रचंड बहूमत मिला हो. लेकिन वीआईपी सीट सिराथू में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मोर्य लगभग 6300 वोट पीछे चल रहें है. सूत्रों का दावा है कि अब बस कुछ ही राउंड की काउंटिंग बची है.
नई दिल्ली : भले ही उत्तर प्रदेश में बीजेपी को प्रचंड बहूमत मिला हो. लेकिन वीआईपी सीट सिराथू में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मोर्य लगभग 6300 वोट पीछे चल रहें है. सूत्रों का दावा है कि अब बस कुछ ही राउंड की काउंटिंग बची है. लग रहा है कि केशव सिराथू से हार भी सकते हैं. आपको बता दें कि उन्हे पल्लवी पटेल कड़ी टक्कर दे रही हैं. रिकाउंटिंग की मांग को लेकर बीजेपी के एजेंट हंगामा कर रहे हैं. ईवीएम में गड़बड़ी के कारण काफी देर से मतगणना का कार्य रुका हुआ है. प्रशासन भी मुस्तैदी मोर्चा संभाले हुए हैं. बताया जा रहा है कि कई बार बीजेपी व विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ भी चुके हैं. हालाकि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.
प्रदेश की हाट सीट मानी जाने वाली कौशांबी की सिराथू सीट पर बीजेपी प्रत्याशी केशव प्रसाद मौर्य, एसपी उम्मीदवार पल्लवी पटेल से करीब 7000 मतों से पीछे हो गए हैं. मतगणना केंद्र के बाहर एसपी और बीजेपी प्रत्याशी लगातार नारेबाजी कर रहे हैं. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है. सिराथू में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ एसपी ने पल्लवी पटेल को टिकट देकर बड़ा दांव खेला था. वहीं, बीएसपी के मुंसब अली उस्मानी के आने से मुकाबला और रोचक हो गया. सिराथू के सियासी समीकरण को देखते हुए कुर्मी वोट एसपी के पक्ष में जाते दिखे जिसका एकतरफा फायदा पल्लवी पटेल को मिला है. कुल मिलाकर मामला बिगड़ गया और मौर्य के लिए रास्ता मुश्किल हो गया. हालांकि, 2012 से बीजेपी यह सीट लगातार जीतते चली आ रही है. इस सीट को पाने के लिए एसपी ने भी पूरा जोर लगा रखा है. इस हॉट सीट पर सभी की निगाहें टिकी हैं.
सिराथू सीट पर समाजवादी पार्टी सिर्फ 2014 के उप चुनाव में जीत दर्ज कर पाई थी. यह उपचुनाव तब हुआ था जब फूलपुर से सांसद चुने जाने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने सिराथू के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था. साल 1993 से लेकर साल 2007 तक सिराथू सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी.
