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सरधना का कपसाड़ गांव बना छावनी, एक आंगन में दिखे सियासी विरोधी- संगीत सोम और अतुल प्रधान

सरधना का कपसाड़ गांव बना छावनी, एक आंगन में दिखे सियासी विरोधी- संगीत सोम और अतुल प्रधान
कपसाड़ा में पीड़ित के घर पहुंचे संगीत सोम और अतुल प्रधान

उत्तर प्रदेश स्थित मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में मां की हत्या और बेटी के अपहरण की वारदात के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. घटना के बाद से गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है. चारों ओर पुलिस बल की तैनाती है, गांव के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और कड़ी पूछताछ के बाद ही लोगों को गांव में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सख्ती जरूरी है.

इसी बीच इस मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है. हैरान करने वाली तस्वीर तब सामने आई जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संगीत सोम और समाजवादी पार्टी के सरधना विधायक अतुल प्रधान पीड़ित परिवार के घर के बाहर, लगभग साथ-साथ बैठे नजर आए.

संगीत सोम ने सपा पर लगाया गंदी सियासत का आरोप

बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि यह सपा सरकार नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार है और यहां जाति या धर्म देखकर कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने कहा कि आरोपी किसी भी मजहब का हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा.

संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सपा गंदी राजनीति कर रही है और अपने नेताओं को भेजकर माहौल को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है.

कपसाड़ गांव मामले पर क्या बोले अतुल प्रधान?

वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान भी पीड़ित परिजनों से मिलने कपसाड़ गांव पहुंचे. शुरुआत में पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब परिजन खुद अतुल प्रधान के पास पहुंचे, तो पुलिस को उन्हें जाने देना पड़ा. एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में अतुल प्रधान ने बताया कि उन्होंने परिजनों और पुलिस प्रशासन से बातचीत की है. इस बातचीत में यह निर्णय लिया गया है कि 48 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी और अपहृत बेटी की सकुशल बरामदगी होनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी.

अतुल प्रधान ने यह भी बताया कि उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को पूरे मामले से अवगत करा दिया है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, इसलिए उन्होंने अपनी ओर से दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है और हर स्तर पर परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया है.

अंतिम संस्कार पर सस्पेंस बरकरार

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दी जाए, क्योंकि परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपना गुजारा करता है.

गांव में हालात अब भी बेहद संवेदनशील हैं. पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और बेटी की बरामदगी नहीं होती, तब तक मृतका का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. समाचार लिखे जाने तक अंतिम संस्कार को लेकर सस्पेंस बना हुआ था.

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