जमीयत उलमा-ए-हिंद ने कश्मीर पर प्रोपगैंडा फैलाने के लिए पाकिस्तान की निंदा की

 
Mahmood Madni

देवबंद [डॉ शिबली इकबाल]: भारत के मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कश्मीर भारत का आतंरिक मसला है। संगठन ने कश्मीर पर प्रस्ताव पारित कर सरकार के फैसले का समर्थन किया है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने कहा है कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मसला है और कश्मीरियों की आशंका को दूर करने की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं की है। साथ ही संगठन ने कहा है कि सरकार को कश्मीरियों की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना चाहिए।

संगठन के पदाधिकारी महमूद मदनी ने कश्मीर पर प्रोपगैंडा और झूठ फैलाने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि भारतीय मुसलमान भारत के खिलाफ हैं।

मदनी ने कहा, ‘हम पाकिस्तान की इस सोच की निंदा करते हैं। हमने आज एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा बताया गया है। हम अपने देश की सुरक्षा एवं अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। भारत हमारा देश है और हम इसके साथ खड़े हैं।

 

प्रस्ताव

जमीयत उलमा-ए-हिन्द का ये जनरल काउंसिल कश्मीर के संबंध में पहले दिन से, कार्यकारिणी सभाओं जनरल काउंसिलस सभाओं में पारित प्रस्तावों और जमीयत के महापुरुषों के दो टूक और मजबूत दृष्टिकोण की रोशनी में अपने उस पुराने और स्पष्ट दृष्टिकोण को दोहराना ज़रूरी समझता है कि कश्मीर हमारे प्यारे देश हिंदुस्तान का अटूट अंग है। और कश्मीर में बसने वाले सभी लोग हमारे हिंदुस्तानी देशवासी हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद सदैव अखंड हिंदुस्तान की समर्थक रही है। और देश की सुरक्षा और एकता इसके निकट बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए वह किसी भी अलगाववाद समर्थक आंदोलन का समर्थन नहीं कर सकती,बल्कि इस तरह के अभियान को न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि स्वयं कश्मीरियों के लिए भी हानिकारक समझती है।

इसी के साथ हम कश्मीरी जनता की इच्छाओं,स्वाभिमान और संस्कृति की पहचान की आवश्यकताओं से हरगिज़ बेपरवाह नहीं हैं। इनके लोकतांत्रिक और मानव अधिकारों की रक्षा, हमारा राष्ट्रीय और मानवीय कर्तव्य है। हमारी दृष्टि में कश्मीरी जनता की तरक्की हिंदुस्तान के साथ जुड़ी हुई है। पड़ोसी देश और दुश्मन ताकतें कश्मीर को बर्बाद करने का उद्देश्य रखती है। पीड़ित और असहाय कश्मीरी जनता दो पाटों के बीच बुरी तरह पिस रही है। दुश्मन ने हिंदुस्तान के विरुद्ध कश्मीर को मोर्चा बना रखा है जो पीड़ितों की फरियाद सुनने में सबसे बड़ी रुकावट है। कश्मीरी जनता की भलाई इसी में है कि इस वर्तमान स्थिति को परिवर्तित किया जाए। जिसके कारण सिर्फ कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति व्यवस्था खतरे में है। इसलिए इस क्षेत्र में सुख-शांति की स्थापना और एटमी शक्तियों के टकराव और अत्यधिक आर्थिक,शारीरिक हानि से सुरक्षा के लिए तुरंत शांति और व्यवस्था के कदम उठाना, समय की आवाज़ है। इसके अलावा मौजूदा स्थितियों के परिदृश्य में जमीयत उलेमा, भारत सरकार से अपील करती है कि मानव अधिकारों की रक्षा करते हुए कश्मीरी जनता की जान व माल की सुरक्षा में कोई दरेग़ न करे। और कश्मीरियों के दिल जीत कर हालात को पुन: व्यवस्थित और ठीक करने के लिए संविधान के अनुसार हर संभव कदम उठाए जाएं।

 

 
 
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