‘मुसलमान राष्ट्रीय गान का पूरा सम्मान…’, वंदे मातरम् विवाद पर जामिया मस्जिद के चीफ इमाम का आया बयान
वंदे मातरम को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है. इसी बीच जामिया मस्जिद के मुख्य इमाम और खतीब मुफ्ती डॉ. मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान राष्ट्रीय गान का पूरा सम्मान करते हैं और हमेशा करते रहेंगे.
इमाम रशादी ने कहा कि हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद लोगों के बीच चिंता का माहौल बना है. उनका कहना है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियाँ ऐसी हैं जो इस्लामी आस्था और अकीदे से मेल नहीं खातीं. ऐसे में इसे अनिवार्य करना सही कदम नहीं माना जा सकता. उन्होंने अपील की कि इस मुद्दे को इस तरह न उठाया जाए जिससे समाज में तनाव पैदा हो.
संविधान और अधिकारों की बात
इमाम ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहाँ का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की आजादी देता है. उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर फैसले दिए हैं. उनका मानना है कि अगर किसी चीज को जबरन लागू किया जाता है तो इससे नागरिकों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि मुसलमान-ए-कर्नाटक और अमारत-ए-शरीया कर्नाटक की ओर से केंद्र सरकार से गुज़ारिश की गई है कि इस नोटिफिकेशन पर दोबारा विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए. उनका कहना है कि जो राष्ट्रीय गान शुरू से पढ़ा जा रहा है और जिसे सभी समुदाय सम्मान के साथ गाते हैं, उसे ही जारी रखा जाए.
राजनीति से दूरी, शांति की अपील
उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देते. उनका मकसद सिर्फ इतना है कि देश में अमन और भाईचारा बना रहे. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री उनकी भावनाओं को समझेंगे और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे देश में तनाव बढ़े. इमाम रशादी ने अंत में कहा कि देश की तरक्की और शांति ही सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए.
