नकुड मे जन्मे जैन संत संतलाल ने जैन समाज देश भर के जैन समाज का पथ पदर्शन किया
नकुड 9 सितबंर इंद्रेश। सहारनपुर जनपद का नकुड नगर कई मायने में महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक है। यंहा विश्व प्रसिद्ध महादेव मंिदर है। वंही श्री भगवान आदिनाथ दिंगंबर जैन मंदिर भी है। इस नगर की मिटटी ने कई मेधावी व मनस्वी व्यक्तित्वो को जन्म दिया है। उन्हंी मे से एक जैन समाज के पुरोधा व कवि संतलालजैन भी है।
संतलाल जैन ने सिद्धचक्रविधान ंिहंदी काव्य भाषा में लिखा है। जो वर्तमान मे भारत के हर ंिदगबंर जैन मंिदर में मिल जायेगा। यह ग्रंथ जैन पूजा विधि को दर्शाता है। जिसका जैन श्रद्धालु पूरी श्रद्धाभाव से स्वाध्याय कर अपने आप को धन्य समझते है। संतलाल जी का जन्म 1834 मे नकुड के संपन्न जैन परिवार मे हुआ था। उनके पिता का नाम सज्जन कुमार था। संतलाल जी की पंाचवी पीढी के लोग आज भी नकुड मे उसी मकान मे रहती है जिसमे संतलाल जी का जन्म हुआ था। सिद्ध चक्रविधान के 938 वे श्लोक मे उन्होंने अपने पिता व पुत्र का नाम दर्शाया है। जो इस प्रकार है।
संत नमन प्रिय हो अती, सज्जन बल्लभ जान।
मनि जन मन प्यारे सही ,नमत होत कल्याण।।
संतलाल जी के परिजन प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि संतलाल जी ने रूडकी इंजितनियरिंग कालेज जो उस समय जो उस समय थामसन कालेज के नाम से जाना जाता था। इंजिनियंरिंग मे डिग्री हासिल की। पंरतु उन्होंने अंग्रेजेा की नौकरी नहंीं की। बताया जाता है कि वे उस समय की प्रसिद्ध कला सांग को लिखने का काम करत थे । कवि हृदय संतलाल जी को किसी ने धार्मिक ग्रंथ लिखने के लिये प्ररेणा दी तो उन्होंने जैन धर्म के सिद्धचक्र विधान को सरल ंिहदी भाषा मे लिखने का काम शुरू किया। उनके ़द्वारा हिंदी मे लिखे गये सिद्धचक्र विधान की पांडुलिपि आज भी नकुड के भगवान आदिनाथ दिगबंर जैन मंदिर मे सुरक्षित रखी है। हांलाकि अब उसकी प्रकाशित प्रतियां लगभग सभी जैन मंिदरो मे बडी श्रद्धा के साथ पढी जाती है। पूर्व मे संस्कृत भाषा मे उपलब्ध था। पंरतु अधिकांश लोग इसे समझ नंही पाते थे। संतलाल जी ने सिद्धचंक्र विधान का हिंदी मे सरलीकरण किया। जिससे जैन श्रद्धालु उस पढकर समझ सकते है। यह ग्रंथ जैन समाज की पूजा पद्यति का एक अनूठा ग्रंथ है।
सिद्धचक्र विधान के अलावा संतलाल जी ने चंद्रप्रभु पूजन, पाश्र्वनाथ पूजन व जैन विवाह विधि कें अलावा संतविलास नामक पुस्तकें भी लिखी है। सिद्धचक्रविधान श्री राजकृष्ण जैन चैरिटेबल ट्रस्ट नई दिल्ली से प्रकाशित है। दूसरी पुस्तके भी प्रकाशित है। संतविलास भी 2022 में जयपुर सर्वोदय अंहिसा द्वारा प्रकाशित की गयी है। इन सभी पुस्तको की मूल प्रतियां नकुड के जैन मंिदर मे सुरक्षित रखी गयी है।

नकुड के जैन समाज के बुजुर्ग पीतमप्रसाद जैन ने बताया कि संतलाल शांत विन्रम स्वभाव के विद्वान व्यक्ति थे। जैन समाज मे उनका नाम बडे आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने जैन समाज को नई दिशा देने का काम किया है। जैन समाज के महामंत्री पंकज जैन ने बताया कि संतलाल जी का वर्ष 1986 मे निधन हो गया था। पंरतु उन्होंने अपने जीवन काल मे जैन समाज का जो दिशा दी वह हमेशा समाज का पथ प्रदर्शन करती रहेगी। पूरा जैन समाज उनका ऋणी है।
