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आतंकवाद के खिलाफ जंग में भारत का बड़ा कदम, यूएन ट्रस्ट को देगा आर्थिक मदद

आतंकवाद के खिलाफ जंग में भारत का बड़ा कदम, यूएन ट्रस्ट को देगा आर्थिक मदद

भारत की ओर से आतंकवाद से निपटने के लिए इस वैश्विक फोरम पर पांच लाख डॉलर का स्वैच्छिक योगदान दिया जाएगा. यह फंड आतंकवाद से निपटने में इस्तेमाल किया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र परिषद की काउंटर टेररिज्म कमेटी (सीटीसी) के सम्मेलन के दूसरे दिन भारत ने एक बड़ी घोषणा की है. भारत की ओर से आतंकवाद से निपटने के लिए इस वैश्विक फोरम पर पांच लाख डॉलर का स्वैच्छिक योगदान दिया जाएगा. यह फंड आतंकवाद से निपटने में इस्तेमाल किया जाएगा. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने की-नोट स्पीच में इस बात की घोषणा की है. इस दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवादी हाईटेक हो रहे हैं और उनसे निपटने के लिए हमें भी पूरी तैयारी करनी होगी.

भारत ने ‘असामाजिक तत्वों’ द्वारा एन्क्रिप्टेड संदेश और क्रिप्टो करेंसी जैसी नयी टेक्नोलॉजी के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयास करने का शनिवार को आह्वान किया और आगाह किया कि सोशल मीडिया मंच आतंकवादी समूहों की ‘टूलकिट’ में प्रभावशाली उपकरण बन गए हैं.

हाईटेक हो रहे आतंकी

दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद निरोधक समिति की विशेष बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवादी समूहों, उनके ‘वैचारिक अनुयायियों’ और ‘अकेले हमला करने वाले’ (लोन वोल्फ) लोगों ने इन नयी टेक्नोलॉजी तक पहुंच हासिल करके अपनी क्षमतायें बढ़ा ली हैं. जयशंकर ने स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान के संदर्भ में यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद रोधी प्रतिबंध व्यवस्था उन देशों को आगाह करने के लिए प्रभावी है, जिन्होंने आतंकवाद को ‘राज्य द्वारा वित्त पोषित उद्यम’ बना लिया है.

सरकारों को लिए बनी चुनौती

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधि दिल्ली में हो रही इस बैठक के दूसरे दिन के सत्र में भाग ले रहे हैं. पहले दिन का सत्र मुंबई में आयोजित किया गया था. जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में तकनीकी नवाचार दुनिया के काम करने के तरीके में परिवर्तनकारी रहे हैं और वर्चुअल निजी नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं से लेकर आभासी मुद्राओं तक नयी और उभरती टेक्नोलॉजी आर्थिक और सामाजिक लाभों के लिए एक आशाजनक भविष्य की पेशकश कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि हालांकि, जब बात आतंकवाद से संबंधित हो तो सिक्के का दूसरा पहलू भी सामने आता है. जयशंकर ने कहा, ‘इन नयी टेक्नोलॉजी ने असामाजिक तत्वों द्वारा दुरुपयोग के लिहाज से कमजोर होने के कारण सरकारों और नियामक संस्थाओं के लिए नयी चुनौतियां पैदा की है.’

हवाई रास्तों से कर रहे सप्लाई

उन्होंने कहा, ‘हाल के वर्षों में, खासतौर से खुले और उदार समाज में आतंकवादी समूहों, उनके वैचारिक अनुयायियों और अकेले हमला करने वाले लोगों ने इन टेक्नोलॉजी तक पहुंच हासिल करके अपनी क्षमताएं बढ़ा ली हैं.’ उन्होंने कहा, ‘वे आजादी, सहिष्णुता और प्रगति पर हमला करने के लिए प्रौद्योगिकी और पैसा और सबसे जरूरी खुले समाज के लोकाचार का इस्तेमाल करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘इंटरनेट और सोशल मीडिया मंच समाज को अस्थिर करने के मकसद से दुष्प्रचार, कट्टरपंथ फैलाने और साजिश रचने के लिए आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों की टूलकिट में प्रभावशाली उपकरण बनकर उभरे हैं.’ जयशंकर ने कहा, ‘आतंकवादी समूहों और संगठित आपराधिक नेटवर्कों द्वारा मानवरहित हवाई प्रणालियों के इस्तेमाल ने दुनियाभर में सरकारों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.’

मुश्किल बढ़ा रही तकनीकि

उन्होंने कहा कि आतंकवादी समूहों द्वारा कुख्यात उद्देश्यों जैसे कि हथियारों और विस्फोटकों की डिलीवरी और लक्षित हमले करने के लिए इन मानवरहित हवाई प्रणालियों का ‘दुरुपयोग आसन्न खतरा’ बन गया है. विदेश मंत्री ने कहा, ‘रणनीतिक, बुनियादी और वाणिज्यिक संपत्तियों के खिलाफ आतंकवादी उद्देश्यों के लिए हथियारबंद ड्रोन के इस्तेमाल की आशंकाओं पर सदस्य देशों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.’ यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भारत में किसी भी रूप में बैठक का आयोजन कर रही है.

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