shobhit University Gangoh
 

भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगता है ऐसा मेला जब दूर होते हैं दोनों देशों के गिले-शिकवे

भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगता है ऐसा मेला जब दूर होते हैं दोनों देशों के गिले-शिकवे

 

  • साल में एक दिन ऐसा भी आता है जब दुश्मनी को भूल भारत-पाकिस्तान के लोग आपस में मिलते हैं
  • पाकिस्तान के अधिकारी और श्रद्धालुओं की तरफ से बाबा चामलियाल की दरगाह पर चादर चढ़ाई जाती है
  • प्रसाद के रूप में दरगाह से शक्कर शरबत भेजा जाता है, इस साल कोरोना के कारण मेला नहीं लगा है

गोविंद चौहान, जम्मू
यूं तो भारत-पाकिस्तान के बीच कई सालों से तनातनी है लेकिन साल में एक दिन ऐसा भी आता है जब दुश्मनी को भूल दोनों मुल्कों के लोग आपस में मिलते हैं। पाकिस्तान के अधिकारी और श्रद्धालुओं की तरफ से बाबा चामलियाल की दरगाह पर चादर चढ़ाई जाती है। प्रसाद के रूप में यहां से शक्कर शरबत भेजा जाता है। इस साल कोरोना के कारण मेला नहीं लगा है।

इसे पाकिस्तान के सैदाबली में स्थित बाबा की दरगाह में रखा जाता है जोकि पूरा साल चलता है। माना जाता है कि पाकिस्तान के नागरिकों के चर्म रोग इस शक्कर-शरबत से ठीक होते हैं। उस दिन सीमा के दरवाजे खोले जाते हैं। पाकिस्तान की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल इस तरफ आता है। बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाई जाती है। इस दिन दोनों तरफ बाबा की याद में मेला लगता है। हजारों की गिनती में दोनों तरफ के श्रद्धालु सीमा पर खड़े होकर मेले का नजारा देखते हैं।

सीमा पर लगता है जमघट
बाबा चामलियाल का देवस्थान सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर की आईबी पर चामलियाल गांव में स्थित है। हर साल हजारों की गिनती में भक्त बाबा की दरगाह पर माथा टेकने के लिए आते हैं। हालांकि सीमा पर पाबंदी के चलते ना इस तरफ के श्रद्धालु पाकिस्तान जा सकते हैं। ना ही उस तरफ के श्रद्धालु भारत आ सकते हैं। बस उस तरफ से चादर आती है और इस तरफ से शक्कर-शरबत जाता है।

जून के चौथे गुरुवार को लगता है मेला
हर साल जून महीने के चौथे गुरुवार को इस देवस्थान पर मेला लगता है। दोनों तरफ की सीमा पर हजारों की गिनती में लोग पहले अपने देवस्थान के दर्शन करते हैं। फिर सीमा पर खड़े होकर दूर से ही दूसरी तरफ स्थित दरगाह को माथा टेकते हैं। इस साल कोरोना के कारण मेला नहीं लगा है। इससे पहले दो साल तक पाकिस्तान से अफसरों को इस तरफ नहीं आने दिया गया क्योंकि पाक ने इस इलाके में वर्ष 2018 में फायरिंग करके चार जवानों को शहीद किया था जिससे की बीएसएफ में गुस्सा था।

इस बार कोरोना के चलते नहीं लगा मेला
इस बार मेले में पाक की टीम के आने पर चर्चा होनी थी लेकिन इस बीच कोरोना के कारण मेले को कैंसल कर दिया गया। डीआईजी बीएसएफ एसपीएस संधु का कहना था कि इस साल कोरोना के कारण मेला नहीं लगा है। इस देवस्थान की सुरक्षा को बीएसएफ देखती है। इसके अलावा स्थानीय कमेटी के साथ मिलकर साफ सफाई से लेकर बाकी काम बीएसएफ करती है।

बाबा दिलीप सिंह की कहानी
बाबा दिलीप सिंह मन्हास पूरे देश में बाबा चामलियाल के नाम से मशहूर हैं। वह गांव चामलियालमें रहते थे। वह उस समय काफी मशहूर हो गए थे। लेकिन कुछ शरारती तत्वों को उनका मशहूर होना गवारा नहीं हो रहा था। उन्होंने बाबा की हत्या की योजना बनाई। एक दिन वे बाबा को लेकर पास ही के गांव सैदावली (जोकि अभी पाकिस्तान में है) में गए। वहां पर बाबा का सिर काट कर हत्या कर दी। उसके बाद मौके से भाग गए।

बताया जाता है कि चमत्कारी शक्ति के कारण बाबा का सिर चामलियाल गांव में आ गया। इसी जगह पर बाबा की दरगाह बनाई गई। दूसरी तरफ सैदवाली में बाबा का बाकी शरीर था। वहां पर भी दरगाह बनाई गई। दोनों देवस्थानों के बीच में करीब आधा किलोमीटर का फर्क है।

बताते हैं कि एक बार बाबा के एक भक्त को चर्म रोग हो गया था। तभी एक रात बाबा उसके सपने में आए। बाबा ने उसे दरगाह की मिट्टी और पानी से नहाने को कहा। इससे वह ठीक हो गया। तब से ही इस देवस्थान की मिट्टी को शक्कर और पानी को शरबत कहा जाता है। सीमा बंटवारे के बाद इस देवस्थान का भी बंटवारा हो गया।

Jamia Tibbia