पूर्वी आर्थिक मंच में पीएम मोदी: रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिए भारत देगा 72 हजार करोड़

 

खास बातें

  • प्रधानमंत्री मोदी ने रूस में 5वें पूर्वी आर्थिक मंच के सत्र को संबोधित किया।
  • उन्होंने कहा कि सुदूर पूर्व के विकास के लिए भारत ऋण देगा।
  • हम ‘सबका साथ सबका विकास’ मंत्र पर नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।
  • 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है।

रूस के व्लादिवोस्तोक में 5वें पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा मानना है कि आज इस मंच पर हमारे विचार मंथन से न केवल सुदूर पूर्व बल्कि पूरी मानव जाति के मानव कल्याण के प्रयासों को बल मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारत और पूर्वी देशों का संबंध नया नहीं है, बल्कि पुराना है। भारत एक ऐसा देश है जिसने व्लादिवोस्तोक में अपना वाणिज्य दूतावास खोला। सोवियत रूस के दौरान भी जब अन्य विदेशियों पर प्रतिबंध था, व्लादिवोस्तोक भारतीयों के लिए खुला था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कल राष्ट्रपति पुतिन के साथ मैंने स्ट्रीट ऑफ दि फार ईस्ट इग्जिबिशन देखी। यहां की विविधता, लोगों की प्रतिभा और टेक्नॉलजी के विकास ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। इनमें प्रगति और सहयोग की अपार संभावनाएं मैंने महसूस की हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस मंच पर आज हमारा विचार मंथन न केवल मानव कल्याण के प्रयासों को मजबूत करेगा, बल्कि संपूर्ण मानव जाति को भी प्रभावित करेगा।

भारत देगा एक अरब डॉलर का ऋण

उन्होंने आगे कहा कि सुदूर पूर्व के विकास के लिए भारत एक अरब डॉलर (72 हजार करोड़) का ऋण देगा। मेरी सरकार ने ‘एक्ट ईस्ट’ योजना के तहत सक्रिय रूप से पूर्वी एशिया को शामिल किया है। यह हमारी आर्थिक कूटनीति को भी एक नया आयाम देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ‘सबका साथ सबका विकास’ मंत्र पर नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। हम 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बना रहे हैं।

मैंने और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं। हमारे संबंधों में हमने नए आयाम जोड़े हैं, उनको विविधता दी है। संबंधों को सरकारी दायरे से बाहर लाकर निजी उद्योग के बीच मजबूत सहयोग तक पहुंचाया है।

प्रकृति पर प्रधानमंत्री के विचार

प्रकृति पर प्रधानमंत्री ने कहा, मित्रों, भारत की प्राचीन सभ्यता के मूल्यों ने हमें सिखाया है कि प्रकृति से उतना ही लें, जितने की जरूरत है। हम प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन पर विश्वास करते हैं। प्रकृति के साथ यही तालमेल सदियों से हमारे अस्तित्व और विकास का अहम हिस्सा रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्ति किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, मैं अपने अनुभव के आधार पर ये बात कह सकता हूं कि फार ईस्ट और व्लादिवोस्तोक के रैपिड, संतुलित और समावेशी विकास के लिए राष्ट्रपति पुतिन का विजन जरूर कामियाब होगा। राष्ट्रपति पुतिन का फार ईस्ट के लिए लगाव और उनका विजन इस क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि भारत जैसे सहोयगी के लिए भी अभूतपूर्व अवसर लेकर आया है।

मुझे राष्ट्रपति पुतिन ने आम चुनाव से पहले निमंत्रण दिया था। 130 करोड़ भारतीयों ने राष्ट्रपति पुतिन के निमंत्रण और मुझ पर भरोसा जताया। मैं इस आमंत्रण के लिए राष्ट्रपति पुतनि का आभार व्यक्त करता हूं।

बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्वी आर्थिक मंच में इंडिया बिजनेस पवेलियन का दौरा किया है। इस बीच उन्होंने इंडो-रशियन इनोवेशन ब्रिज का उद्धाटन किया है

 

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