खेड़ा मुगल में गांधी जी ने लगाई थी स्वतंत्रता आंदोलन की अलख

खेड़ा मुगल में गांधी जी ने लगाई थी स्वतंत्रता आंदोलन की अलख
  • ग्राम कोटा के राजा आसाराम और लंढोरा की रानी जसमीत कौर ने भी लंबे समय तक गांव खेड़ा मुगल पर शासन किया था
देवबंद [24CN] : देवबंद तहसील का मुगलकालीन गांव खेड़ा मुगल भी अपने भीतर देश की जंगे आजादी भी मुहिम सजाए हैं असहयोग आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खेड़ा मुगल पहुंच लोगों से स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया था नतीजतन बड़े पैमाने पर क्षेत्र के सभी समुदाय के लोग स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और फिरंगी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका|
यूं तो नाम से ही प्रतीत होता है कि तहसील क्षेत्र का गांव खेड़ा मुगल मुगल मुगलकालीन है, लेकिन इस गांव से आंदोलन की एक ऐसी चिंगारी भी उठी थी, जिस ने असहयोग आंदोलन को भड़काया था|वैसे तो पुराने दौर में इस गांव में करीब 226 बीघा का तालाब था, जिसमें मुगल बादशाह घूमने आते थे और कश्ती चलाते थे|ब्रिटिश हुकूमत में लंढौरा की रानी जसमीत कौर और कोटा के राजा आसाराम ने भी इस गांव पर लंबे समय तक शासन किया, रानी द्वारा स्थापित किया गया प्राचीन शिव मंदिर गांव में आज भी अलग स्थान बनाए हुए हैं|असहयोग आंदोलन के दौरान इस प्राचीन मंदिर के निकट ही वर्ष 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सभा के थी|खेड़ा मुगल पहुंचने के दौरान गांधीजी ने जनपद में अलग-अलग स्थानों का भ्रमण कर लोगों में स्वतंत्रता की अलख जगाई थी| बताते हैं कि खेड़ा मुगल में सभा करने के बाद गांधी जी पास के गांव सरकंडी में भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने चौपाल लगाते हुए ब्रिटिश हुकूमत को असहयोग देने के लिए संकल्प भी दिलवाया था