असदुद्दीन ओवैसी के इस फैसले पर चौंके इमरान मसूद! कहा- मुझे समझ में नहीं आता कि जब…

असदुद्दीन ओवैसी के इस फैसले पर चौंके इमरान मसूद! कहा- मुझे समझ में नहीं आता कि जब…
इमरान मसूद और असदुद्दीन ओवैसी

Saharanpur : पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ आने की घोषणा पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी है. सहारनपुर सांसद ने इस अलायंस पर चौंकते हुए कहा- ‘मुझे असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर के बीच इस गठबंधन की बात समझ नहीं आती क्योंकि वे इस तरह की राजनीति नहीं करते.’

इससे पहले कांग्रेस ने ओवैसी के इस फैसले पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस ने कहा, ‘धन्यवाद ओवैसी. आपने अपना धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा हटा दिया है और दुनिया को अपना असली सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है.’ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ओवैसी ने खुद को बीजेपी की ‘बी-टीम’ ही नहीं बल्कि उसका ‘सच्चा साथी’ भी साबित कर दिया है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने AIMIM-AJUP गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा, ‘धन्यवाद, असदुद्दीन ओवैसी. आपने अपना धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा हटा दिया है और दुनिया को अपना असली सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है.’उन्होंने कहा, ‘आपने यह भी दिखा दिया कि आप न सिर्फ बीजेपी की बी-टीम हैं, बल्कि उसके सच्चे साथी भी हैं. लोग हुमायूं कबीर पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने पार्टी बनाने के लिए पैसा लिया है. तो क्या आपको दिल्ली से फंड मिल रहा है? जनता सब समझती है और वह आपको पश्चिम बंगाल के साथ-साथ हैदराबाद के चुनावों में भी आपकी स्थिति दिखा देगी.’

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘जहां भी धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा होता है, उसका फायदा अंततः बीजेपी को ही मिलता है. ओवैसी इसके लिए जाने जाते हैं और उन पर अक्सर ऐसे आरोप लगते हैं. वह निश्चित रूप से ऐसी रणनीति अपनाते हैं ताकि वोटों का विभाजन हो सके. इसलिए हम कहते हैं कि वह बीजेपी की बी-टीम के रूप में काम करते हैं.’

JMM और बीजेपी ने क्या कहा?

JMM के प्रवक्ता मनोज पांडे ने भी कहा, ‘मुझे लगता है कि अब ओवैसी को एक-दो राज्यों में कुछ सफलता मिली है. उन्होंने बीजेपी को मजबूत किया है और धर्मनिरपेक्ष दलों व ताकतों को कमजोर किया है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है. मुझे लगता है कि बंगाल की राजनीति के संदर्भ में वह कहीं फिट नहीं बैठेंगे.’जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी तंज कसते हुए कहा, ‘चाहे वह हुमायूं कबीर हों या ओवैसी, सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो जहर बोया है, उसने ऐसे कई किरदार पैदा किए हैं जो उसी जहर को बढ़ाने का काम कर रहे हैं. जब एक स्वाभाविक विकल्प मौजूद है, तो ऐसे तत्वों का कोई महत्व नहीं रहेगा और इन चुनावों में उनका अस्तित्व मायने नहीं रखेगा.’

इस बीच, बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह ओवैसी की पार्टी है और अगर वह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह उनका स्वतंत्र निर्णय है. पार्टी अपने संगठन का विस्तार करना चाहती है और कई जगहों पर उसकी मौजूदगी है. ओवैसी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया है और एक लोकतांत्रिक पार्टी होने के नाते उसके नेता उसी अनुसार काम करते हैं.’294 सदस्यीय बंगाल विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को होगा और मतगणना 4 मई को होगी.AIMIM-AJUP गठबंधन आगामी चुनावों में मुस्लिम बहुल सीटों पर वोट शेयर को प्रभावित कर सकता है. इन चुनावों को मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है.


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