Atishi का विधानसभा स्पीकर को पत्र, ये नियम याद दिलाकर जताई कड़ी आपत्ति; ‘…तो फिर लोकतंत्र कैसे बचेगा?’

विधानसभा परिसर में दाखिल होने से ही रोक दिया
उन्होंने बताया कि यह अन्याय यहीं नहीं रुका, कल 27 फरवरी को जब निलंबित विधायक लोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा परिसर में मौजूद गांधी की प्रतिमा के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे थे, तो उन्हें विधानसभा के गेट से 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया और विधानसभा परिसर में दाखिल होने से ही रोक दिया गया। यह केवल विधायकों का ही नहीं, बल्कि जनता द्वारा दिए गए जनादेश का भी अपमान है।
विपक्ष के विधायकों के अधिकारों का किया जा रहा हनन
विधानसभा स्पीकर को याद दिलाया नियम
आतिशी ओर से कहा गया कि हमने देश की संसद में भी यह परंपरा देखी है कि जब किसी सांसद को सदन से निलंबित किया जाता है, तो उन्हें संसद परिसर में जाकर गांधी प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन करने की अनुमति होती है। यह एक संवैधानिक परंपरा रही है, जिसे आज तक किसी ने नहीं तोड़ा। लेकिन दिल्ली विधानसभा में यह पहली बार हुआ है कि चुने गए विधायकों को विधानसभा परिसर में घुसने तक नहीं दिया गया।आतिशी ने आगे कहा अध्यक्ष जी, जिस नियम का हवाला देकर विपक्षी विधायकों को रोका गया, उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा कि निलंबित विधायक विधानसभा गेट में प्रवेश नहीं कर सकते या गांधी और आंबेडकर की प्रतिमा तक नहीं जा सकते। ऐसे में यह स्पष्ट है कि यह निर्णय केवल विपक्ष को दबाने और उनकी आवाज को कुचलने के लिए लिया गया।
आतिशी ने कहा हमारा संविधान हमें यह अधिकार देता है कि हम लोकतांलिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकें। लेकिन अगर विपक्ष की आवाज को ही दबा दिया जाएगा, अगर विधायकों को जनता के सवाल सदन के अंदर और बाहर उठाने से रोका जाएगा, तो फिर लोकतंत्र बचेगा कैसे?